मुंबई. महाराष्ट्र में 2026 के निकाय चुनावों, विशेषकर बीएमसी (BMC) के लिए चुनावी रण पूरी तरह से सज चुका है। 15 जनवरी 2026 को होने वाले मतदान से ठीक पहले मुंबई की राजनीति में भारी उथल-पुथल देखी जा रही है।
1. चुनावी कार्यक्रम और मुख्य मुकाबले
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मतदान की तारीख: 15 जनवरी, 2026
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नतीजे: 16 जनवरी, 2026
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कुल सीटें: 227 (बहुमत के लिए 114 सीटें आवश्यक)
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मुख्य गठबंधन:
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महायुति: भाजपा (135+ सीटें) + एकनाथ शिंदे की शिवसेना (89+ सीटें) + अजीत पवार की एनसीपी।
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विपक्षी मोर्चा: उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT) + राज ठाकरे (MNS) + शरद पवार की एनसीपी (SP) + कांग्रेस।
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2. बड़े नेताओं के हालिया बयान और रणनीतिक वार
बीएमसी चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह दिग्गजों के लिए ‘अस्तित्व की लड़ाई’ बन गया है:
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एकनाथ शिंदे (मुख्यमंत्री): शिंदे ने स्पष्ट कहा है कि मुंबई का अगला मेयर “मराठी और महायुति” का ही होगा। उन्होंने विपक्षी गठबंधन (राज-उद्धव) पर निशाना साधते हुए इसे “अस्तित्व बचाने की छटपटाहट” बताया और कहा कि लोग “भावुक मुद्दों के बजाय विकास (मेट्रो, कोस्टल रोड)” को वोट देंगे।
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देवेंद्र फडणवीस (उप-मुख्यमंत्री): फडणवीस ने अवैध घुसपैठियों (बांग्लादेशियों और रोहिंग्या) का मुद्दा उठाते हुए ‘AI तकनीक’ के उपयोग की बात की है। उन्होंने राज ठाकरे की भूमिका पर तंज कसते हुए कहा कि “राज ठाकरे इस गठबंधन में सबसे बड़े हारने वाले होंगे क्योंकि उनका लाभ केवल उद्धव को मिलेगा।”
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उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT): उद्धव ने ‘मराठी अस्मिता’ और ‘मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश’ को मुख्य मुद्दा बनाया है। उन्होंने भाजपा पर “वोट चोरी” और मुंबई की संपत्तियों को बाहरी लोगों को सौंपने का आरोप लगाया है।
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राज ठाकरे (MNS): वर्षों बाद अपने भाई उद्धव के साथ आए राज ठाकरे ने “संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन” की याद दिलाते हुए मराठी मानुष को एकजुट होने की अपील की है।
3. इस बार के 3 प्रमुख राजनीतिक समीकरण (Analysis)
क. ठाकरे बंधुओं की एकजुटता: ‘मराठी कार्ड’ बनाम ‘हिंदुत्व’
राज और उद्धव ठाकरे का एक साथ आना इस चुनाव का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है। उनका उद्देश्य उन मराठी वोटों को वापस पाना है जो भाजपा की ओर शिफ्ट हो गए थे। इसके जवाब में भाजपा और शिंदे गुट “हिंदुत्व और विकास” का संगम पेश कर रहे हैं।
ख. मेयर पद और “क्षेत्रीय बनाम बाहरी” का विवाद
भाजपा नेता अन्नामलाई के मुंबई को ‘ग्लोबल सिटी’ कहने और कृपाशंकर सिंह के ‘उत्तर भारतीय मेयर’ वाले पुराने बयानों को विपक्षी दलों ने हथियार बना लिया है। शिंदे और फडणवीस अब रक्षात्मक मुद्रा में यह साफ कर रहे हैं कि मुंबई का मेयर केवल मराठी ही होगा।
ग. कल्याण-डोम्बिवली और ठाणे का प्रभाव
बीएमसी के साथ-साथ ठाणे और कल्याण-डोम्बिवली जैसे नगर निगमों में भी चुनाव हैं। महायुति ने यहाँ 68 उम्मीदवार निर्विरोध जीतकर शुरुआती मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल कर ली है, जिसका असर मुंबई के मतदाताओं पर पड़ सकता है।
4. मुख्य चुनावी मुद्दे
| मुद्दा | प्रभाव |
| मराठी अस्मिता | ठाकरे गुट का मुख्य हथियार, मराठी वोटर्स को एकजुट करने की कोशिश। |
| विकास कार्य | कोस्टल रोड और मेट्रो का क्रेडिट लेने की होड़। |
| भ्रष्टाचार | विपक्षी दलों द्वारा बीएमसी में पिछले 2-3 वर्षों के ‘प्रशासक राज’ पर सवाल। |
| घुसपैठ | महायुति द्वारा हिंदुत्व के वोटों को ध्रुवीकृत करने का प्रयास। |
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