भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में विनायक दामोदर सावरकर एक ऐसी बहुआयामी शख्सियत रहे हैं, जिनकी छाप भारतीय राजनीति और समाज पर आज भी बहुत गहरी है। वे केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक प्रखर विचारक, क्रांतिकारी, समाज सुधारक और साहित्यकार थे।
सावरकर का मानना था कि विदेशी हुकूमत की नींव हिलाने के लिए वैचारिक जागृति के साथ-साथ सशक्त और संगठित विद्रोह भी आवश्यक है।
1. सशस्त्र क्रांति का बीजारोपण: लंदन और अभिनव भारत
विनायक दामोदर सावरकर ने छात्र जीवन से ही आजादी की अलख जगाना शुरू कर दिया था।
- अभिनव भारत (1904): नासिक में उन्होंने अपने भाई बाबाराव के साथ मिलकर पहले ‘मित्र मेला’ और बाद में ‘अभिनव भारत’ नाम से गुप्त क्रांतिकारी संगठन की नींव रखी।
- लंदन और इंडिया हाउस: 1906 में वकालत की पढ़ाई के लिए लंदन जाने के बाद उन्होंने श्यामजी कृष्ण वर्मा के ‘इंडिया हाउस’ को क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र बनाया और ‘फ्री इंडिया सोसाइटी’ के जरिए भारतीय छात्रों को संगठित किया।
- 1857 का प्रथम स्वातंत्र्य समर: लंदन की लाइब्रेरी में अध्ययन कर सावरकर ने सिद्ध किया कि 1857 की क्रांति मात्र एक “सिपाही विद्रोह” नहीं, बल्कि भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। उनकी लिखी यह पुस्तक छपने से पहले ही ब्रिटिश हुकूमत द्वारा प्रतिबंधित कर दी गई थी।
2. अंडमान की सेलुलर जेल: नर्क की साक्षात अनुभूति
1910 में लंदन में गिरफ्तारी के बाद सावरकर को दो आजीवन कारावास (50 वर्ष) की सजा सुनाकर अंडमान की सेलुलर जेल (काला पानी) भेजा गया।
- अमानवीय यातनाएँ: कैदियों से कोल्हू चलवाकर नारियल तेल निकलवाना, कठोर शारीरिक दंड देना और बेहद दूषित भोजन देना वहाँ का नित्य का नियम था।
- दीवारों पर रचा साहित्य: जेल में कागज-कलम न मिलने पर सावरकर ने नुकीले पत्थरों और अपने नाखूनों से जेल की दीवारों पर हजारों पंक्तियाँ और ‘कमला’ जैसे महाकाव्य लिखे।
- रणनीतिक याचिकाएं (Petitions): जेल की चहारदीवारी में सड़ने के बजाय बाहर आकर पुनः देश और समाज सेवा करने के उद्देश्य से उन्होंने तत्कालीन कानूनी प्रावधानों के तहत याचिकाएं भेजी थीं।
3. एक परिवार का सर्वस्व अर्पण
सावरकर परिवार भारतीय इतिहास के उन दुर्लभ परिवारों में से है, जिसके तीनों भाइयों (गणेश, विनायक और नारायण सावरकर) ने देश की स्वतंत्रता के लिए जेल की सजा काटी। ब्रिटिश हुकूमत ने उनके नासिक स्थित घर और संपत्ति की जब्ती व नीलामी तक कर दी थी, जिसके कारण परिवार को वर्षों तक भारी विपन्नता और सामाजिक दूरी का सामना करना पड़ा।
4. सावरकर बनाम गांधी: वैचारिक दृष्टिकोण
- अहिंसा बनाम न्यायसंगत बल: महात्मा गांधी जहाँ पूर्ण अहिंसा और हृदय परिवर्तन में विश्वास रखते थे, वहीं सावरकर का मानना था कि आक्रामक शत्रु के विरुद्ध सैन्य शक्ति और शस्त्र उठाना न्यायसंगत है।
- पूर्ण स्वराज: सावरकर ने शुरुआत से ही पूर्ण स्वतंत्रता की वकालत की, जबकि आरंभिक वर्षों में कांग्रेस डोमिनियन स्टेटस (अधिराज्य) के विकल्पों पर विचार कर रही थी।
- तुष्टिकरण का विरोध: उन्होंने खिलाफत आंदोलन के समर्थन की नीति की तीखी आलोचना की थी।
5. रत्नागिरी में समाज सुधार और प्रखर तर्कवाद
1924 में अंडमान से रिहाई के बाद सावरकर को रत्नागिरी में नजरबंद किया गया। इस दौरान उन्होंने हिंदू समाज की कुरीतियों पर करारा प्रहार किया:
- सात बेड़ियों का उन्मूलन: उन्होंने वेदोक्त, व्यवसाय, स्पर्श, सिंधु, शुद्धि, रोटी और बेटी बंदी जैसी रूढ़िवादी सामाजिक पाबंदियों को तोड़ने पर बल दिया।
- पतित पावन मंदिर (1931): रत्नागिरी में ऐसा मंदिर बनवाया जहाँ समाज के सभी वर्गों और जातियों को समान पूजा अधिकार मिला।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Rationalism): सावरकर ने अंधविश्वासों का विरोध किया और समाज को आधुनिक विज्ञान, तर्कशास्त्र और सैन्यीकरण अपनाने का संदेश दिया।
- भाषा शुद्धि: उन्होंने हिंदी और मराठी भाषा में ‘दिग्दर्शक’ (Director), ‘महापौर’ (Mayor) जैसे कई व्यावहारिक पारिभाषिक शब्द दिए।
6. स्वतंत्रता-उत्तर काल और विरासत
1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद सावरकर को मुकदमे में नामजद किया गया, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में 1949 में न्यायालय ने उन्हें सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया। जीवन के अंतिम वर्षों में गुमनामी और राजकीय उपेक्षा के बीच, 26 फरवरी 1966 को उन्होंने ‘प्रायोपवेशन’ (भोजन-जल त्याग) के माध्यम से स्वेच्छा से देह त्याग किया।
आज संसद के सेंट्रल हॉल में लगी सावरकर की तैलचित्र प्रतिमा और भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा व सामाजिक समरसता पर उनके विचार आधुनिक भारत के विमर्श में अत्यंत प्रासंगिक हैं।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1: वीर सावरकर की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम क्या है?
उत्तर: उनकी सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति ‘The Indian War of Independence 1857’ (1857 का स्वातंत्र्य समर) है।
Q2: सावरकर ने किस गुप्त क्रांतिकारी संस्था की स्थापना की थी?
उत्तर: उन्होंने वर्ष 1904 में ‘अभिनव भारत सोसाइटी’ की स्थापना की थी।
Q3: सावरकर द्वारा रत्नागिरी में बनवाए गए प्रसिद्ध मंदिर का नाम क्या है?
उत्तर: उन्होंने 1931 में ‘पतित पावन मंदिर’ की स्थापना की, जो सभी जातियों के लिए समान रूप से खुला था।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख ऐतिहासिक दस्तावेजों, शोध ग्रंथों और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित एक विवरणात्मक प्रस्तुति है। इसका उद्देश्य किसी भी राजनीतिक दृष्टिकोण का प्रचार करना नहीं, बल्कि इतिहास के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और वैचारिक विमर्शों को तटस्थ रूप से प्रस्तुत करना है।

