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ईरान में गृहयुद्ध जैसे हालात: प्रिंस रजा पहलवी की वापसी और खामेनेई की कुर्सी पर संकट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

तेहरान. ईरान में इस समय 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद का सबसे बड़ा जन-विद्रोह देखा जा रहा है। दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब एक ‘मिनी-क्रांति’ का रूप ले चुके हैं। ईरान की सड़कों पर इस समय ‘आज़ादी’ के नारों के साथ हिंसा का तांडव जारी है। आर्थिक बदहाली, रिकॉर्ड तोड़ महंगाई और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब सीधे तौर पर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती दे रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी उभरे हैं, जो 50 साल बाद वतन वापसी की तैयारी कर रहे हैं।

1. प्रदर्शनों की वर्तमान स्थिति: ‘अभूतपूर्व हिंसा और दमन’

जनवरी 2026 के मध्य तक स्थिति यह है कि ईरान के लगभग सभी बड़े प्रांतों में विरोध की आग फैल चुकी है।

  • भारी हताहत: मानवाधिकार संगठनों (HRANA और Amnesty) के अनुसार, अब तक 2,600 से 3,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। कुछ अपुष्ट रिपोर्टें यह संख्या 10,000 के पार बता रही हैं।

  • सामूहिक गिरफ्तारियां: अब तक 50,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि ईरान की न्यायपालिका प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादी’ घोषित कर ‘स्पीड ट्रायल’ के जरिए मृत्युदंड देने की योजना बना रही है।

  • डिजिटल ब्लैकआउट: ईरान सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट और सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है ताकि दुनिया तक दमन की तस्वीरें न पहुँच सकें।

2. प्रिंस रजा पहलवी का ‘बड़ा दांव’

ईरान के आखिरी शाह के बेटे, प्रिंस रजा पहलवी, जो दशकों से अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे हैं, इस आंदोलन के मुख्य रणनीतिकार बनकर उभरे हैं।

  • वतन वापसी का ऐलान: प्रिंस ने हाल ही में घोषणा की है कि वह “क्रांति की जीत” के समय अपने देशवासियों के साथ खड़े होने के लिए ईरान लौट रहे हैं।

  • सेना से अपील: उन्होंने ईरान की सेना और सुरक्षा बलों से हथियार डालने और जनता का साथ देने की अपील की है।

  • भविष्य का खाका: पहलवी ने एक ‘लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और शांतिपूर्ण’ ईरान का वादा किया है, जो आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देगा और दुनिया के साथ सामान्य रिश्ते बनाएगा।

3. वैश्विक प्रतिक्रिया और ट्रंप की भूमिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सरकार को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों का कत्लेआम नहीं रुका, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि, हालिया बयानों में ट्रंप ने प्रिंस पहलवी को समर्थन देने पर थोड़ा संकोच दिखाया है, यह कहते हुए कि “पहलवी अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन अभी यह देखना बाकी है कि उन्हें ईरान के भीतर कितना जनसमर्थन मिलता है।”

4. विद्रोह का कारण: क्यों नहीं थम रही आग?

यह केवल हिजाब या धार्मिक कानूनों का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे आर्थिक कारण हैं:

  • मुद्रा का पतन: ईरानी रियाल (IRR) का मूल्य गिरकर $1 \text{ USD} = 1,400,000 \text{ IRR}$ के पार पहुँच गया है।

  • महंगाई: खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 100% से ज्यादा की वृद्धि ने आम जनता का जीना दूभर कर दिया है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।