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कानपुर फल मंडी भाव आज: सेब, अनार और केले की कीमतों में बड़ा बदलाव, देखें ताज़ा लिस्ट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

कानपुर. शहर की चकेरपुर फल मंडी में फरवरी की शुरुआत के साथ ही फलों की आवक तेज़ बनी हुई है। 4 फरवरी 2026 के आसपास मंडी में सेब, केला, अनार, अंगूर और संतरा जैसे प्रमुख फलों के थोक भाव में हल्का उतार-चढ़ाव देखा गया है। व्यापारियों के अनुसार मौसम, आवक और क्वालिटी के आधार पर दामों में अंतर बना हुआ है।

?? कानपुर फल मंडी के अनुमानित थोक भाव

(प्रति क्विंटल / प्रति क्रेट)

फल का नामन्यूनतम भाव (₹)अधिकतम भाव (₹)औसत भाव (₹)
सेब (Apple)6,00012,0009,000
केला (Banana)200350280
अनार (Pomegranate)8,00014,00011,000
पपीता (Papaya)1,5002,5002,000
अंगूर (Grapes)4,0007,0005,500
संतरा (Orange)3,0005,5004,200

? क्यों बदल रहे हैं फलों के दाम?

✔️ क्वालिटी और वैरायटी का असर

मंडी में फलों की कीमतें उनकी किस्म और ताजगी पर निर्भर करती हैं।
उदाहरण के तौर पर कश्मीरी सेब के दाम सामान्य सेबों की तुलना में अधिक बने हुए हैं, जबकि मध्यम क्वालिटी के सेब अपेक्षाकृत सस्ते मिल रहे हैं।

? आवक और सप्लाई

फरवरी में उत्तर भारत की मंडियों से आवक बढ़ने लगती है, जिससे कुछ फलों में दाम स्थिर रहते हैं, जबकि सीमित सप्लाई वाले फलों में तेजी देखी जाती है।

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⏰ सही समय पर खरीदारी जरूरी

व्यापारियों का कहना है कि सुबह 4 बजे से 7 बजे के बीच मंडी पहुँचने पर

  • ताज़ा माल
  • बेहतर रेट
  • अधिक विकल्प
    मिलते हैं।

? थोक बनाम फुटकर कीमत

ये भाव थोक व्यापारियों के लिए हैं।
कानपुर के रिटेल बाजारों में यही फल 20% से 40% तक महंगे दामों पर बिकते नजर आ सकते हैं।

⚠️ जरूरी सूचना

मंडी के भाव हर घंटे बदलते रहते हैं। सबसे सटीक और ताज़ा जानकारी के लिए चकेरपुर फल मंडी के स्थानीय आढ़तियों से संपर्क करना बेहतर माना जाता है।

अगर आप थोक में फल खरीदने या व्यापार से जुड़े हैं, तो फरवरी की शुरुआत का यह समय फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, खरीदारी से पहले क्वालिटी और ताज़ा भाव की पुष्टि जरूर करें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।