कानपुर: शहर के चर्चित लेम्बोर्गिनी हादसे में एक नया मोड़ आया है। 6 लोगों को रौंदने के आरोपी और तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को पुलिस ने गुरुवार सुबह नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया, लेकिन कानूनी दांवपेच और पुलिस की कमजोर पैरवी के चलते उसे महज 7 घंटे के भीतर कोर्ट से जमानत मिल गई।
एम्बुलेंस से भागने की कोशिश और गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, आरोपी शिवम मिश्रा लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था और जांच में सहयोग नहीं कर रहा था। गुरुवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी एम्बुलेंस के जरिए शहर छोड़ने की फिराक में है। घेराबंदी कर पुलिस ने उसे सुबह 8 बजे उसके घर के सामने से हिरासत में लिया।
पेशी के दौरान शिवम मिश्रा की स्थिति चर्चा का विषय रही। उसके हाथ में वीगो (IV Cannula) लगी थी और वह बीमार नजर आ रहा था। हालांकि, कोर्ट परिसर में मीडियाकर्मियों को देख वह भड़क गया और इशारों में वीडियो बनाने पर आपत्ति जताई।
कोर्ट में क्यों फेल हुई पुलिस?
कानपुर पुलिस ने कोर्ट से आरोपी की 14 दिन की रिमांड मांगी थी। सुनवाई के दौरान जज ने जांच अधिकारी (IO) से तीखे सवाल पूछे:
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कोर्ट का सवाल: “जब आरोपी पर लगाई गई सभी धाराएं जमानती (Bailable) हैं, तो रिमांड की आवश्यकता क्यों है?”
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पुलिस की चुप्पी: इस सवाल पर जांच अधिकारी कोई भी ठोस कानूनी तर्क या आधार पेश नहीं कर पाए।
नतीजतन, एसीजेएम (ACJM) कोर्ट ने पुलिस की रिमांड अर्जी को खारिज कर दिया और 20,000 रुपये के बेल बॉन्ड पर शिवम मिश्रा को रिहा करने का आदेश दे दिया।
केस को दबाने और ‘डमी’ ड्राइवर पेश करने की कोशिश
हादसे के बाद से ही आरोपी के पिता और दिग्गज कारोबारी केके मिश्रा अपने बेटे को बचाने के प्रयास में जुटे थे।
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झूठा दावा: पहले पिता ने दावा किया कि गाड़ी बेटा नहीं चला रहा था।
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सरेंडर का ड्रामा: बुधवार को मोहन नाम के एक व्यक्ति ने कोर्ट में सरेंडर कर खुद को ड्राइवर बताया था, जिसे कोर्ट ने संदिग्ध मानते हुए उसकी अर्जी खारिज कर दी थी।
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कमिश्नर की पुष्टि: पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि तकनीकी जांच और साक्ष्यों से साबित होता है कि स्टीयरिंग पर शिवम मिश्रा ही था।
जनता में आक्रोश
6 लोगों के घायल होने के बावजूद, इतने हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी का इतनी जल्दी बाहर आ जाना शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस की “ठोस जवाब न दे पाने” की स्थिति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या रसूख के आगे पैरवी कमजोर पड़ गई?
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