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सुप्रीम कोर्ट की नीरज पांडे को कड़ी फटकार: “जब तक नाम नहीं बदलेंगे, फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज नहीं होगी”

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के शीर्षक पर सख्त नाराजगी जताते हुए फिल्ममेकर नीरज पांडे को जोरदार फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस तरह के आपत्तिजनक टाइटल के साथ फिल्म को रिलीज करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

“समाज के एक हिस्से को बदनाम क्यों कर रहे हैं?” – सुप्रीम कोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस की पीठ ने नीरज पांडे से सवाल किया कि आखिर फिल्म के लिए ऐसे विवादित शब्दों का चयन क्यों किया गया? कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा:

“आप ऐसा टाइटल इस्तेमाल करके समाज के एक हिस्से को बदनाम क्यों कर रहे हैं? यह शीर्षक नैतिकता और पब्लिक ऑर्डर (सार्वजनिक व्यवस्था) के खिलाफ है। जब तक आप हमें बदला हुआ टाइटल नहीं बताते, हम फिल्म रिलीज नहीं होने देंगे।”

केंद्र और CBFC को नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने नेटफ्लिक्स पर फिल्म की रिलीज रोकने की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और नीरज पांडे को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने इस मामले में ओटीटी प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए हैं।


विवाद की पूरी कहानी: टीजर से लेकर कोर्ट तक

  • शुरुआत: विवाद की नींव 03 फरवरी 2026 को पड़ी, जब नेटफ्लिक्स ने अपने ‘इंडिया प्लान 2026’ के तहत इस फिल्म का टीजर रिलीज किया।

  • कहानी का आधार: फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अफसर की भूमिका में हैं, जिसे महकमे में ‘पंडत’ कहा जाता है।

  • जनता का आक्रोश: टीजर आते ही सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया और लोग सड़कों पर उतर आए। आरोप है कि यह फिल्म एक विशेष समुदाय की गरिमा को ठेस पहुँचाती है।

  • कानूनी लड़ाई: भारी विरोध के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जहाँ अब फिल्म के भविष्य पर तलवार लटक गई है।

क्या होगा अगला कदम?

कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद नीरज पांडे और नेटफ्लिक्स को फिल्म का नाम बदलना ही होगा। यदि फिल्ममेकर्स नाम बदलने को तैयार होते हैं, तभी फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो पाएगा।

यह भी पढ़ें : ‘घूसखोर पंडत’ विवाद: मायावती की बैन मांग से लेकर FIR और टीज़र हटने तक, जानिए पूरा मामला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।