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UC बर्कले से लापता भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया का शव बरामद, IIT मद्रास के पूर्व छात्र थे साकेत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

बेंगलुरु. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (UC), बर्कले में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया को लेकर एक बेहद दुखद खबर आई है। 9 फरवरी से लापता साकेत का शव सैन फ्रांसिस्को में बरामद कर लिया गया है। सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास (Consulate General of India) ने इस खबर की पुष्टि करते हुए मृतक छात्र के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

9 फरवरी से थे लापता

कर्नाटक के रहने वाले साकेत श्रीनिवासैया बर्कले में केमिकल और बायोमॉलिक्यूलर इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहे थे। उन्हें आखिरी बार 9 फरवरी को कैंपस से करीब एक किलोमीटर दूर देखा गया था। लापता होने के बाद स्थानीय पुलिस और भारतीय समुदाय ने उनकी तलाश में व्यापक अभियान चलाया था।

जांच में मिले अहम सुराग

तलाशी के दौरान पुलिस को कैंपस के पास स्थित टिल्डेन रीजनल पार्क के पास एक घर से साकेत का बैकपैक बरामद हुआ था, जिसमें उनका पासपोर्ट और लैपटॉप मौजूद था। इसके बाद लेक अंजा और बर्कले हिल्स जैसे इलाकों में भी उनकी खोज की गई, लेकिन अंततः उनका शव बरामद हुआ।

एक मेधावी वैज्ञानिक का दुखद अंत

साकेत श्रीनिवासैया की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद शानदार थी:

  • वे IIT मद्रास के पूर्व छात्र थे।

  • उनके पास ‘हाइपरलूप के लिए माइक्रोचैनल कूलिंग सिस्टम’ के आविष्कार का पेटेंट था।

  • वे अपनी मेधा और वैज्ञानिक सोच के लिए अपने साथियों और प्रोफेसरों के बीच लोकप्रिय थे।

दूतावास दे रहा है हर संभव मदद

भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि वे स्थानीय अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं। दूतावास ने आश्वासन दिया है कि साकेत के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने के लिए सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है और परिवार को हर संभव सहायता दी जा रही है।

दुखद पहलू: पिछले कुछ महीनों में अमेरिका में भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। साकेत जैसे होनहार छात्र का इस तरह जाना भारतीय समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति है।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।