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बिल गेट्स का आंध्र प्रदेश दौरा: चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण के साथ AI और स्वास्थ्य पर बड़ी चर्चा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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विजयवाड़ा. माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और दुनिया के जाने-माने परोपकारी बिल गेट्स आज सोमवार, 16 फरवरी को आंध्र प्रदेश के दौरे पर पहुंचे। हालांकि, खराब मौसम और घने कोहरे के चलते उनके आगमन में कुछ समय की देरी हुई।

आसमान में काटना पड़ा चक्कर

बिल गेट्स का निजी विमान जब विजयवाड़ा एयरपोर्ट के पास पहुंचा, तो घने कोहरे के कारण दृश्यता (visibility) काफी कम थी। सुरक्षा कारणों से एटीसी ने तुरंत लैंडिंग की अनुमति नहीं दी, जिसके कारण उनके विमान को काफी देर तक हवा में ही चक्कर काटना पड़ा। मौसम साफ होने के बाद ही विमान सुरक्षित रूप से रनवे पर उतर सका।

भव्य स्वागत और उच्च स्तरीय बैठक

एयरपोर्ट पर बिल गेट्स का स्वागत करने के लिए प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

लैंडिंग के बाद बिल गेट्स ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण से मुलाकात की। इस बैठक में राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया।

चर्चा के मुख्य बिंदु: स्वास्थ्य और तकनीक

राज्य के शहरी निकाय मंत्री पी. नारायण के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य बिल गेट्स फाउंडेशन और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच सहयोग को और मजबूत करना है। बैठक के मुख्य विषय निम्नलिखित रहे:

  • स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: बिल गेट्स फाउंडेशन वर्तमान में चित्तूर जिले के कुप्पम में स्वास्थ्य परियोजनाओं पर काम कर रहा है। सरकार अब इन परियोजनाओं को पूरे राज्य में विस्तारित करने की योजना बना रही है।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): मुख्यमंत्री ने राज्य के शासन और अन्य क्षेत्रों में एआई के समावेश पर विशेष जोर दिया।

  • तकनीकी सहयोग: स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों को लेकर भी चर्चा की गई।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और बिल गेट्स के बीच संबंध दशकों पुराने हैं। 90 के दशक में हैदराबाद को ‘साइबराबाद’ बनाने और माइक्रोसॉफ्ट का विकास केंद्र वहां स्थापित करने में इन दोनों की साझेदारी की अहम भूमिका रही थी। अब ‘AI’ के दौर में यह मुलाकात फिर से एक नई तकनीकी क्रांति की नींव रख सकती है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।