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एक पिता का प्रायश्चित उम्मीद जगाता है: क्या अन्विता विश्वास करेगी कि संजय सुधर सकता है और अपने विवाह को दूसरा मौका देगी, सोनी सब के ‘इत्ती सी खुशी’ में?

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई, फरवरी 2026: सोनी सब का शो इत्ती सी खुशी अन्विता (सुम्बुल तौकीर खान) की कहानी दिखाता है, जो हमेशा मुश्किल हालात में अपने परिवार के लिए मज़बूती से खड़ी रही है। उसने अपने पिता सुहास (वरुण बडोला) को शराब की लत से जूझते देखा है और इसके कारण कई दर्दनाक पल झेले हैं। लेकिन अब जब हालात बदलने लगे हैं, उसे अपने प्यार, माफ़ी और आत्मसम्मान को लेकर बड़ा फैसला लेना है।

आने वाले एपिसोड्स में सुहास रिहैबिलिटेशन से घर लौटता है, पूरी तरह सुधरा हुआ और नशे से दूर। अपने पिता को सचमुच अपनी ज़िंदगी सुधारने की कोशिश करते देख अन्विता को यकीन होने लगता है कि इंसान बदल सकते हैं। यही बदलाव उसे अपने विवाह के बारे में सोचने पर मजबूर करता है। संजय (ऋषि सक्सेना) ने गुस्से में उसे थप्पड़ मारा था, जिसके बाद अन्विता ने रिश्ता छोड़ दिया था। अब जब संजय उससे माफ़ी माँगता है और दूसरा मौका चाहता है, तो अन्विता सोचने लगती है कि क्या उसे भी एक और मौका देना चाहिए। वह उलझन में है—क्या वह अपने आत्मसम्मान की रक्षा करे या उम्मीद रखे कि संजय भी बदल सकता है।

क्या अन्विता संजय को दूसरा मौका देगी, या इस बार खुद को चुनेगी?

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सुम्बुल तौकीर खान, जो अन्विता का किरदार निभा रही हैं, ने कहा, “अन्विता के लिए यह समय बहुत भावुक और उलझन भरा है। उसने बचपन से अपने पिता को संघर्ष करते देखा है, इसलिए जब वह सचमुच बदलने की कोशिश करते हैं तो उसे उम्मीद होती है कि लोग बदल सकते हैं। लेकिन अपने विवाह का दर्द वह भूल नहीं सकती। वह थप्पड़ सिर्फ एक घटना नहीं थी, उसने उसके आत्मसम्मान को हिला दिया था। इस समय अन्विता उम्मीद और डर के बीच फँसी हुई है—एक तरफ उसे लगता है कि प्यार सब ठीक कर सकता है, दूसरी तरफ उसे फिर से भरोसा करने का डर है। यह उम्मीद और डर का मिश्रण बहुत सच्चा है और मुझे लगता है कि बहुत लोग इससे जुड़ाव महसूस करेंगे।”

देखिए इत्ती सी खुशी, हर सोमवार से शनिवार रात 9 बजे, सिर्फ सोनी सब पर।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।