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आयकर अधिनियम 2025: HRA क्लेम और विदेशी आय टैक्स क्रेडिट के नए नियम लागू

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विदेशी टैक्स क्रेडिट (FTC) की पुष्टि करते चार्टर्ड अकाउंटेंट का सांकेतिक चित्र।

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने कर प्रणाली में पारदर्शिता लाने और राजस्व की चोरी रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। आयकर अधिनियम, 2025 के तहत नए मसौदा नियमों और फॉर्मों को सार्वजनिक कर दिया गया है। इन प्रस्तावित बदलावों का सीधा असर नौकरीपेशा वर्ग, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के कामकाज पर पड़ेगा।

HRA क्लेम: अब मकान मालिक से ‘रिश्तेदारी’ बताना अनिवार्य

नए नियमों में सबसे चर्चित बदलाव हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को लेकर है। प्रस्तावित फॉर्म 124 के तहत अब करदाताओं को यह स्पष्ट करना होगा कि जिस मकान मालिक को वे किराया दे रहे हैं, उससे उनका कोई पारिवारिक या अन्य संबंध है या नहीं।

  • क्यों लिया गया यह फैसला? विभाग का मानना है कि कई मामलों में करदाता अपने माता-पिता या रिश्तेदारों को किराया दिखाकर टैक्स छूट का लाभ उठाते हैं, जबकि वास्तविकता में कोई लेनदेन नहीं होता।

  • असर: इस खुलासे से फर्जी रेंट रसीदों के जरिए टैक्स चोरी करने वालों पर लगाम लगेगी।

विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट: ऑडिटर्स की बढ़ी जिम्मेदारी

विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट (FTC) के दावों को अब कड़ी जांच से गुजरना होगा। प्रस्तावित फॉर्म 44 के तहत अब चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) को केवल दस्तावेजों पर भरोसा नहीं करना होगा, बल्कि उन्हें स्वतंत्र रूप से निम्नलिखित की पुष्टि करनी होगी:

  1. विदेशी कर कटौती का वास्तविक प्रमाण।

  2. विनिमय दर (Exchange Rate) का सही रूपांतरण।

  3. कर संधि (DTAA) के तहत पात्रता की बारीकी से जांच।

PAN आवेदन में दोहराव खत्म करने की तैयारी

कंपनियों के लिए अब PAN आवेदन प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त होगी। आवेदन के समय कंपनियों को यह हलफनामा देना होगा कि उनके पास पहले से कोई PAN मौजूद नहीं है। यदि किसी सहायक इकाई या पिछली संस्था के नाम पर PAN है, तो उसकी जानकारी साझा करना अनिवार्य होगा।

अगले महीने अधिसूचित होंगे नियम

सरकार ने इन प्रस्तावित नियमों पर सभी हितधारकों (Stakeholders) से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सुझावों पर विचार करने के बाद अगले महीने तक अंतिम नियमों और नए फॉर्मों को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया जाएगा।

कर विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार का उद्देश्य ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ-साथ कर अनुपालन (Tax Compliance) को मजबूत करना है, ताकि केवल वास्तविक दावों को ही कर लाभ मिल सके।

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