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इजरायल-लेबनान युद्ध: रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ का बड़ा आदेश, हिज्बुल्लाह के खिलाफ ‘आर-पार’ की जंग शुरू

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

यरूशलेम. पश्चिम एशिया (West Asia) में युद्ध के बादल अब पूरी तरह से बरसने को तैयार हैं। इजरायल के नवनियुक्त रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ (Israel Katz) ने कार्यभार संभालते ही एक ऐसा बड़ा सैन्य आदेश जारी किया है, जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। काट्ज़ ने इजरायली रक्षा बलों (IDF) को लेबनान की सीमा के भीतर घुसकर हिज्बुल्लाह के खिलाफ “पूर्ण सैन्य कार्रवाई” और निरंतर आगे बढ़ने की हरी झंडी दे दी है।

“हिज्बुल्लाह को हर हमले की कीमत चुकानी होगी”

रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने अपने पहले संबोधन में स्पष्ट कर दिया कि इजरायल अब केवल ‘रक्षात्मक’ (Defensive) मोड में नहीं रहेगा। उन्होंने कहा:

“हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—उत्तरी इजरायल के नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी। जब तक हिज्बुल्लाह का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता और वे लिटानी नदी के पीछे नहीं धकेल दिए जाते, तब तक यह अभियान नहीं रुकेगा। हर हमले की भारी कीमत चुकानी होगी।”

IDF की ज़मीनी और हवाई कार्रवाई: युद्ध का नया चरण

रक्षा मंत्री के आदेश के चंद घंटों के भीतर ही IDF ने दक्षिणी लेबनान और बेरुत के उपनगरीय इलाकों (Dahieh) में भीषण बमबारी शुरू कर दी है।

  • लक्षित हमले: इजरायली वायुसेना ने हिज्बुल्लाह के उन रॉकेट लॉन्चरों और मोर्टार ठिकानों को तबाह करने का दावा किया है, जहाँ से गैलिली और हाइफ़ा जैसे शहरों पर गोलाबारी की जा रही थी।

  • जमीनी घुसपैठ (Ground Offensive): टैंकों और पैदल सेना की टुकड़ियों ने सीमा पार कर लेबनान के गांवों में हिज्बुल्लाह के बंकरों और सुरंगों (Tunnels) को नष्ट करना शुरू कर दिया है।

मुख्य घटनाक्रम और वैश्विक प्रभाव

1. 2006 के बाद सबसे बड़ा सैन्य संकट

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह 2006 के लेबनान युद्ध के बाद का सबसे भीषण सैन्य टकराव है। इस बार इजरायल का उद्देश्य केवल हिज्बुल्लाह को पीछे धकेलना नहीं, बल्कि उनकी सैन्य क्षमता को जड़ से खत्म करना है।

2. मानवीय संकट और विस्थापन

इस युद्ध की सबसे बड़ी कीमत नागरिक चुका रहे हैं।

  • इजरायल: उत्तरी सीमा से लगभग 60,000 से अधिक नागरिक पिछले कई महीनों से विस्थापित हैं।

  • लेबनान: दक्षिणी लेबनान से लाखों लोग बेरुत और सीरिया की ओर पलायन कर रहे हैं। स्कूलों और अस्पतालों को आश्रय स्थलों में बदल दिया गया है।

3. ईरान की भूमिका और वैश्विक चिंता

संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूरोपीय संघ ने इस तनाव पर गहरी चिंता जताई है। विशेषज्ञों को डर है कि यदि इजरायल लेबनान में बहुत गहराई तक जाता है, तो हिज्बुल्लाह का संरक्षक ईरान सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल हो सकता है। इससे यह एक “क्षेत्रीय महायुद्ध” (Regional War) का रूप ले सकता है।

लेबनान युद्ध की वर्तमान स्थिति: एक नज़र में

विशेषताविवरण
मुख्य कमांडरइजरायल काट्ज़ (इजरायल) बनाम हिज्बुल्लाह नेतृत्व
युद्ध का केंद्रदक्षिणी लेबनान और उत्तरी इजरायल (ब्लू लाइन क्षेत्र)
हथियारसटीक गाइडेड मिसाइलें, ड्रोन और जमीनी टैंक
मुख्य मांगहिज्बुल्लाह को ‘लिटानी नदी’ के पार धकेलना

कूटनीति या तबाही?

फिलहाल सीमा पर हालात “अत्यंत संवेदनशील” हैं। जहाँ एक ओर इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य बल के प्रयोग पर अड़ा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति वार्ता की अपील कर रहा है। इजरायली सेना के अगले 48 घंटे यह तय करेंगे कि यह संघर्ष विराम की ओर बढ़ेगा या एक पूर्ण विनाशकारी युद्ध की ओर।

दुनिया की नज़रें अब केवल सीमा पर नहीं, बल्कि वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रिया पर भी टिकी हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।