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सोनी सब के ‘इत्ती सी खुशी’ में होली सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान ऋषि सक्सेना के ‘नागिन डांस’ ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

 

मुंबई, मार्च 2026: सोनी सब का शो इत्ती सी खुशी अपनी दिल छू लेने वाली कहानी और ज़िंदगी से जुड़ी गर्माहट के साथ दर्शकों के दिलों में लगातार जगह बना रहा है। खोताचिवाड़ी की रंगीन गलियों में आगे बढ़ती कहानी अब होली के सीक्वेंस के साथ रंग, शोर, भावनाओं और परिवार के भीतर छिपे तनावों का खूबसूरत संगम पेश करने वाली है। यहाँ की होली सिर्फ एक त्यौहार ही नहीं, बल्कि रिश्तों और भावनाओं का आईना बन जाती है। अन्विता (सुम्बुल तौकीर खान) के लिए होली ज़िंदगी की छोटी-छोटी खुशियों की याद दिलाने का नाम है। लेकिन, जैसे ही रंग उड़ते हैं और पूरा मोहल्ला जश्न में डूब जाता है, अन्विता, विराट (रजत वर्मा) और संजय (ऋषि सक्सेना) के बीच छिपी भावनाएँ सामने आने लगती हैं।

इसी बीच खोताचिवाड़ी की होली का माहौल अचानक मज़ेदार मोड़ लेता है। रंगों की बौछार और ढोल की गूँज के बीच संजय सबको चौंकाते हुए बीच मोहल्ले में बिंदास नागिन डांस करने लगते हैं। उनके ड्रामेटिक फ्लोर मूव्स और ओवर-द-टॉप एक्सप्रेशंस देखकर पूरा मोहल्ला इकट्ठा हो जाता है और तालियाँ बजाते हुए इस नज़ारे का मज़ा लेता है। यह पल न सिर्फ होली ट्रैक में मस्ती का तड़का लगाता है, बल्कि शो इत्ती सी खुशी की असली पहचान बेफिक्र और दिल से जीने वाली भावना को भी खूबसूरती से प्रदर्शित करता है।

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अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए, ऋषि सक्सेना कहते हैं, “यह पहली बार नहीं है, जब मैंने सेट पर होली का सीक्वेंस शूट किया हो, लेकिन यह सबसे यादगार रहा। हर शो इसे अलग तरीके से दिखाता है, लेकिन इस बार जो खास था, वह इसकी ऑर्गेनिक और खोताचिवाड़ी की दुनिया से जुड़ी हुई फीलिंग थी। लोग संजय को आमतौर पर शांत और भावनात्मक रूप से गहरे किरदार के रूप में देखते हैं, इसलिए बीच मोहल्ले में फुल-ऑन नागिन डांस करना सबके लिए सरप्राइज था और मेरे लिए बेहद मज़ेदार। ऑन-स्क्रीन त्यौहार आपको थोड़ा खुलकर जीने का मौका देते हैं और मुझे उस पागलपन में डूबना बहुत अच्छा लगा। शूटिंग के दौरान माहौल इतना जीवंत था कि यह काम कम और असली होली का जश्न ज़्यादा लग रहा था।”

देखिए इत्ती सी खुशी, हर सोमवार से शनिवार रात 9 बजे, सिर्फ सोनी सब पर।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।