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बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: चुनाव आयोग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और हाई-टेक बदलाव

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों का जायजा लेने के बाद भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में चुनावी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं होगी। कोलकाता में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने राज्य प्रशासन और राजनीतिक दलों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और भयमुक्त माहौल में संपन्न कराए जाएंगे।

चुनावी हिंसा पर ‘जीरो टॉलरेंस’

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “बंगाल में किसी भी प्रकार की चुनावी हिंसा को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मतदाताओं या चुनाव अधिकारियों को डराने-धमकाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए पूरे राज्य में केंद्रीय सुरक्षा बलों की पर्याप्त तैनाती की जाएगी।

तकनीक से सुसज्जित होगा इस बार का चुनाव

आयोग ने इस बार पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई ‘हाई-टेक’ बदलाव किए हैं:

  • 100% वेबकास्टिंग: राज्य के सभी 80,000 से अधिक मतदान केंद्रों पर लाइव वेबकास्टिंग होगी, जिसकी निगरानी सीधे दिल्ली और कोलकाता स्थित नियंत्रण कक्षों से की जाएगी।

  • EVM पर रंगीन फोटो: पहली बार EVM मशीनों पर उम्मीदवारों की ब्लैक एंड व्हाइट की जगह रंगीन फोटो दिखाई देगी।

  • लाइव अपडेट: चुनाव आयोग की वेबसाइट और ऐप पर हर दो घंटे में मतदान प्रतिशत का लाइव अपडेट दिया जाएगा।

मतदाता सूची और सुरक्षा व्यवस्था

मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायतों पर ज्ञानेश कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार न्यायिक अधिकारी 60 लाख से अधिक नामों का सत्यापन कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक भी वैध मतदाता का नाम सूची से बाहर नहीं रहेगा। इसके अलावा, भीड़ कम करने के लिए प्रत्येक बूथ पर अधिकतम 1200 मतदाताओं की सीमा तय की गई है।

क्या मार्च के मध्य में होगी घोषणा?

चुनाव कितने चरणों में होंगे, इसका निर्णय कानून-व्यवस्था की अंतिम समीक्षा के बाद लिया जाएगा। हालांकि, सूत्रों का संकेत है कि आयोग 15 या 16 मार्च के आसपास आधिकारिक रूप से चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है।

मुख्य बिंदु:

  • विपक्ष और सत्तापक्ष के आरोपों पर आयोग ने कहा कि वह केवल संविधान और कानून के तहत काम करता है।

  • उम्मीदवार मतदान के 7 दिनों के भीतर EVM की जांच की मांग कर सकते हैं।

  • युवाओं को जोड़ने के लिए कॉलेजों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।

matribhumisamachar.com/politics/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।