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महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर ‘वज्रप्रहार’: शादी के नाम पर खेल खत्म, 10 साल की जेल और भारी जुर्माना

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

मुंबई. महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में जबरन, प्रलोभन या धोखाधड़ी से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाया है। गृह राज्यमंत्री पंकज भोयर ने विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026’ पेश किया है। इस विधेयक के कानूनी रूप लेने के बाद, राज्य में शादी के नाम पर या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराना अब एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध होगा।

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की तर्ज पर बने इस कानून में सजा और जुर्माने के इतने कड़े प्रावधान हैं कि अपराधी की रूह कांप जाए। आइए जानते हैं इस नए कानून की हर छोटी-बड़ी बात।

1. कानून का मुख्य उद्देश्य: सुरक्षा और पारदर्शिता

इस कानून का प्राथमिक लक्ष्य उन लोगों की रक्षा करना है जिन्हें शादी का झांसा देकर, पैसे का लालच देकर या डरा-धमकाकर उनका धर्म बदलवा दिया जाता है। सरकार का तर्क है कि यह कानून संविधान द्वारा प्रदत्त ‘धार्मिक स्वतंत्रता’ के अधिकार को और मजबूती देगा, ताकि कोई भी व्यक्ति किसी बाहरी दबाव के बिना अपने धर्म का पालन कर सके।

महाराष्ट्र विधानसभा सत्र 2026 की ताजा खबरें

2. धर्मांतरण की नई और सख्त प्रक्रिया

अब अपनी मर्जी से धर्म बदलने की प्रक्रिया भी पहले जैसी सरल नहीं होगी। इसमें पारदर्शिता लाने के लिए कुछ अनिवार्य चरण जोड़े गए हैं:

  • 60 दिन पहले नोटिस: धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को कम से कम 2 महीने पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को लिखित सूचना देनी होगी।

  • सार्वजनिक आपत्ति: सूचना मिलने के बाद प्रशासन इसे सार्वजनिक करेगा और 30 दिनों तक आपत्तियों का इंतजार किया जाएगा।

  • पंजीकरण: प्रक्रिया पूरी होने के 25 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

3. ‘प्रलोभन’ की परिभाषा हुई व्यापक

इस कानून के तहत केवल नकद पैसा ही लालच नहीं माना जाएगा। निम्नलिखित को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है:

  • मुफ्त शिक्षा या बेहतर जीवनशैली का वादा।

  • नौकरी या करियर में उन्नति का प्रलोभन।

  • चमत्कारिक उपचार (Divine Healing) या दैवीय कृपा का दावा।

  • शादी का झांसा देकर मतांतरण।

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के धर्मांतरण कानूनों का तुलनात्मक अध्ययन

4. कौन दर्ज करा सकता है FIR?

अक्सर पीड़ित व्यक्ति दबाव में शिकायत नहीं कर पाता, इसलिए कानून ने इसका दायरा बढ़ा दिया है। अब पीड़ित के माता-पिता, भाई-बहन या खून के रिश्ते और विवाह से जुड़े रिश्तेदार पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ऐसी शिकायत मिलते ही पुलिस के लिए FIR दर्ज करना अनिवार्य होगा।

⚖️ सजा और जुर्माने का पूरा चार्ट

अपराध की श्रेणीजेल की सजाजुर्माना
विवाह के जरिए अवैध मतांतरण7 साल तक₹1 लाख
नाबालिग/SC-ST/महिला के साथ अपराध7 साल तक₹5 लाख
सामूहिक मतांतरण (Mass Conversion)7 साल तक₹5 लाख
बार-बार अपराध करने पर10 साल तक₹5 लाख

5. जांच और कानूनी पेच

इस कानून की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें ‘सबूत का भार’ (Burden of Proof) उस व्यक्ति या संस्था पर होगा जो धर्म परिवर्तन करा रही है। उन्हें अदालत में यह साबित करना होगा कि यह धर्मांतरण जबरन या धोखाधड़ी से नहीं किया गया है। साथ ही, इसकी जांच सब-इंस्पेक्टर से नीचे के रैंक का अधिकारी नहीं कर पाएगा।

पंकज भोयर का विशेष साक्षात्कार: क्यों जरूरी था यह कानून?

6. अन्य राज्यों का प्रभाव

महाराष्ट्र अब उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जहाँ धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्य शामिल हैं। महाराष्ट्र का यह मसौदा अन्य राज्यों की तुलना में अधिक विस्तृत माना जा रहा है क्योंकि इसमें पीड़ितों के पुनर्वास और बच्चों के भरण-पोषण के विशेष प्रावधान भी जोड़े गए हैं।

निष्कर्ष

महाराष्ट्र सरकार का यह कदम राज्य की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है। जहां समर्थक इसे “लव जिहाद” और “जबरन धर्मांतरण” के खिलाफ एक ढाल मान रहे हैं, वहीं आलोचक इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामले में सरकार का हस्तक्षेप बता रहे हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।