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पीएम मोदी की ईरान के राष्ट्रपति से सीधी बात: पश्चिम एशिया में छिड़े ‘इंफ्रास्ट्रक्चर वॉर’ पर भारत ने जताई सख्त चिंता

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण तनाव और सैन्य संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 21 मार्च 2026 को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर विस्तृत बातचीत की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में बुनियादी ढांचे (Critical Infrastructure) को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन चरमरा गई है।

त्योहारों के बहाने शांति का कड़ा संदेश

पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पेजेश्कियान को ईद और नवरोज की शुभकामनाएं देते हुए बातचीत की शुरुआत की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने इस पावन समय में क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि की कामना की है। हालांकि, इस शुभकामना संदेश के पीछे एक गंभीर कूटनीतिक चिंता भी छिपी थी।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की कड़ी निंदा: भारत की बढ़ी चिंता

हाल के दिनों में तेल डिपो, गैस पाइपलाइनों और बिजली संयंत्रों पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने इसकी कड़ी निंदा की। भारत का मानना है कि महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले न केवल क्षेत्रीय अशांति बढ़ाते हैं, बल्कि दुनिया भर में ऊर्जा संकट (Energy Crisis) पैदा कर सकते हैं।

खास बात: विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर है, इसलिए इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा भारत की टॉप प्रायोरिटी है।

समुद्री सुरक्षा: Strait of Hormuz पर भारत का रुख साफ

बातचीत का सबसे अहम हिस्सा समुद्री सुरक्षा और ‘नेविगेशन की स्वतंत्रता’ (Freedom of Navigation) रहा। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का उल्लेख किया।

  • शिपिंग मार्ग: पीएम ने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग सुरक्षित और खुले रहने चाहिए।

  • भारतीय हित: वर्तमान में इस मार्ग में तनाव के कारण कई वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे भारतीय निर्यातकों और आयातकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

ईरान की BRICS से बड़ी अपील: ‘आक्रामकता रोकें’

दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने भारत की सदस्यता वाले संगठन BRICS से एक स्वतंत्र और प्रभावी भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए अमेरिका और इजरायल की “आक्रामकता” पर लगाम लगाना जरूरी है। ईरान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों, विशेषकर ब्रिक्स के जरिए पश्चिमी देशों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

भारत की ‘बैलेंसिंग एक्ट’ कूटनीति

यह बातचीत दर्शाती है कि भारत इस संघर्ष में किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय ‘नियम-आधारित व्यवस्था’ और ‘आर्थिक सुरक्षा’ पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। भारत के लिए ईरान एक रणनीतिक साझेदार है (चाबहार बंदरगाह के कारण), जबकि इजरायल और अमेरिका के साथ भी उसके गहरे रक्षा संबंध हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।