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ललितपुर के तेरईफाटक में ‘राम राज्य’ की झलक: श्रीराम जन्मोत्सव पर ग्रामीणों ने ली नशा मुक्ति की शपथ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

ललितपुर (उत्तर प्रदेश) | 27 मार्च, 2026

बुंदेलखंड की धरती पर भक्ति और सामाजिक चेतना का एक अनूठा संगम देखने को मिला। जिले के तेरईफाटक ग्राम में ‘महाकाल प्रभातफेरी’ के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम जन्मोत्सव केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहाँ ग्रामीणों ने कुरीतियों को जड़ से मिटाने का शंखनाद भी किया।

भोर की पहली किरण के साथ गूंजे जयकारे

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 5:00 बजे हुई, जब पूरा गांव भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। कड़ाके की श्रद्धा के बीच ग्रामीणों ने स्नान कर प्रभातफेरी निकाली और गांव के प्रमुख मंदिर पर भव्य आरती का आयोजन किया गया। भक्तिमय माहौल में ‘जय श्रीराम’ के नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा।

“राम केवल भगवान नहीं, जीवन का आदर्श हैं”

महाकाल प्रभातफेरी के संरक्षक मनोज कुमार तिवारी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा:

“राम का जीवन हर वर्ग के लिए प्रेरणा है। चाहे मां शबरी हों या केवट, राम ने सबको अपनाया। यदि हम अपने बच्चों को राम की कहानियां सुनाएंगे, तभी उनमें संस्कारों का बीजारोपण होगा और हमारा जीवन सुखमय बनेगा।”

वहीँ, सनातन सांस्कृतिक संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी डॉ. वी. आर. विश्वकर्मा ने युवाओं में देशभक्ति जगाने और सनातन धर्म के संरक्षण के लिए संगठित होकर कार्य करने का आह्वान किया।

भक्ति के बीच सामाजिक क्रांति: ली गई बड़ी शपथ

इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि समापन के अवसर पर उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी उठाई। ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से:

  1. बाल-विवाह जैसी कुरीति को रोकने और

  2. धूम्रपान (नशा) को त्यागने की शपथ ली।

खीर का प्रसाद और जन-सहभागिता

उत्सव के अंत में ग्रामवासियों के सहयोग से साबूदाना की खीर का वितरण किया गया। कार्यक्रम में ओमप्रकाश शास्त्री, छोटेलाल प्रजापति, कमलेश भारद्वाज सहित सैकड़ों की संख्या में पुरुष व महिलाएं (जैसे रमा तिवारी, गुड्डी राजा, रैना यादव आदि) उपस्थित रहीं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।