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कानपुर मंडी भाव 28 मार्च: गेहूं MSP के पार, जानें उड़द और अरहर के ताजा रेट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

कानपुर, शनिवार 28 मार्च 2026

उत्तर प्रदेश की प्रमुख व्यापारिक मंडियों में से एक, कानपुर की चकरपुर मंडी में आज अनाज और दलहन के थोक भावों में संतुलन की स्थिति देखी गई। होली के बाद बाजार पूरी तरह खुल चुका है और नई फसल की आवक शुरू होने के बावजूद कीमतों में कोई बड़ी गिरावट या उछाल दर्ज नहीं किया गया है। व्यापारियों का मानना है कि वर्तमान मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर तालमेल के कारण बाजार फिलहाल ‘स्टडी मोड’ में है।

? प्रमुख फसलों के ताजा भाव (₹ प्रति क्विंटल)

आज मंडी में गेहूं से लेकर उड़द तक की कीमतों में जो उतार-चढ़ाव दिखा, उसकी विस्तृत सूची नीचे दी गई है:

जिंस (Crop)न्यूनतम भाव (₹)अधिकतम भाव (₹)बाजार रुझान
गेहूं (Common)2,4002,600स्थिर (MSP के करीब)
चना (Desi)5,4005,500सामान्य मांग
अरहर (तूर)7,0007,500मजबूत
उड़द (हरा)10,80011,100उच्च मांग
मूंग6,0007,800आवक अनुसार
सरसों6,6006,700स्थिर
तिल्ली8,0008,600सीमित आवक

? बाजार विश्लेषण: क्यों टिके हुए हैं भाव?

  1. MSP की ढाल: केंद्र और यूपी सरकार द्वारा रबी सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,585 तय किया गया है। चकरपुर मंडी में गेहूं के भाव ₹2,600 तक पहुंच रहे हैं, जिससे किसानों को सरकारी खरीद केंद्रों के बजाय खुले बाजार में भी अच्छा विकल्प मिल रहा है।

  2. सरकारी खरीद का आगाज: उत्तर प्रदेश में 30 मार्च से सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन के साथ तुलाई शुरू होने वाली है। इसका मनोवैज्ञानिक असर मंडी के भावों पर दिख रहा है, जिससे कीमतें MSP से नीचे नहीं गिर रही हैं।

  3. दलहन में तेजी: उड़द और अरहर जैसी दालों में स्टॉक की कमी और त्योहारी सीजन के बाद की निरंतर मांग के कारण कीमतें ₹11,000 के स्तर को छू रही हैं।

? किसानों और व्यापारियों के लिए जरूरी बात

मंडी जानकारों के मुताबिक, आने वाले सप्ताह में यदि मौसम साफ रहता है और आवक बढ़ती है, तो गेहूं और सरसों के भावों में मामूली सुधार या बदलाव देखने को मिल सकता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी उपज को अच्छी तरह सुखाकर (कम नमी के साथ) लाएं ताकि उन्हें ‘A-Grade’ दाम मिल सकें।

अस्वीकरण: मंडी भाव प्रतिदिन की आवक और फसल की गुणवत्ता (Quality & Moisture) के आधार पर बदलते रहते हैं। व्यापार करने से पहले स्थानीय मंडी समिति से भावों की पुष्टि अवश्य करें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।