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कानपुर: बी.एन.एस.डी. शिक्षा निकेतन में श्रद्धा के साथ मनाई गई गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर के बी.एन.एस.डी. शिक्षा निकेतन में रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती

कानपुर | गुरुवार, 7 मई 2026  

बेनाझाबर स्थित बी.एन.एस.डी. (B.N.S.D.) शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज में विश्वविख्यात साहित्यकार, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। श्री ब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामण्डल द्वारा संचालित इस संस्थान में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को टैगोर के आदर्शों और उनके सांस्कृतिक योगदान से परिचित कराना था।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ भव्य शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिसर में दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पार्पण और मंगलाचरण के साथ हुई। विद्यालय प्रशासन और शिक्षकों ने गुरुदेव टैगोर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पूरा वातावरण गुरुदेव के प्रति सम्मान और भक्ति से सराबोर नजर आया।

कानपुर के प्रमुख विद्यालयों में सांस्कृतिक आयोजन – matribhumisamachar.com/

विद्यार्थियों की सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रस्तुतियाँ

समारोह के दौरान छात्रों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किए:

  • प्रेरणादायी भाषण: कक्षा 7-C की छात्रा कु० अर्णिका ने अंग्रेजी भाषा में टैगोर के जीवन और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य विचारों पर प्रकाश डाला। वहीं, कक्षा 7-A के छात्र भै० आकर्षि ने हिंदी में गुरुदेव के राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक चेतना पर प्रभावी भाषण दिया।

  • संगीतमय प्रस्तुति: कक्षा 8 के छात्र भै० अस्तित्व ने टैगोर के सुप्रसिद्ध गीत “एकला चलो रे” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इस गीत ने वहां मौजूद सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

‘वन्दे मातरम’ के साथ समापन

समारोह का समापन सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम” के गायन के साथ हुआ। विद्यालय की उपप्रधानाचार्या और शिक्षकों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। विद्यालय प्रशासन ने संदेश दिया कि विद्यार्थियों को टैगोर के नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में उतारना चाहिए और साहित्य व संस्कृति के प्रति जागरूक रहना चाहिए।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।