– प्रहलाद सबनानी 21वीं सदी में शक्ति संघर्ष का स्वरूप बहुत तेजी से बदल रहा है। अब विभिन्न देशों के बीच संघर्ष, तोप, मिसाईल एवं सेनाओं के माध्यम से नहीं लड़े जा रहे हैं बल्कि तकनीकि उपलब्धता, मुद्रा नियंत्रण, पूंजी प्रवाह, खाद्य सुरक्षा, आकड़ों (डेटा) का संग्रहण, नियम निर्माण को …
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