आज जब ‘सच्चाई’ और ‘सुविधा’ के बीच पत्रकारिता की परिभाषा धुंधली होती जा रही है, तब पत्रकारिता जगत के उस दैदीप्यमान नक्षत्र को याद करना अनिवार्य हो जाता है जिसने अपनी कलम को ही क्रांति का हथियार बना लिया था। हम बात कर रहे हैं ‘प्रताप’ के संपादक और अमर …
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