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अटल इनोवेशन मिशन ने इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित करने के लिये मांगे गए आवेदन

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नई दिल्ली (मा.स.स.). नीति आयोग के तहत अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) ने अपने दो अग्रणी कार्यक्रमों अटल इनक्यूबेशन केंद्र (एआईसी) और अटल कम्यूनिटी इनोवेशन केंद्र (एसीआईसी) के लिये आवेदन की शुरूआत कर दी है। आवेदन इनक्यूबेटरों के मौजूदा इको-सिस्टम को बढ़ाने और विश्वस्तरीय मानकों तथा उत्कृष्ट तौर-तरीकों तक उनकी पहुंच बनाने के उद्देश्य से मांगे गए हैं। दोनों कार्यक्रमों में देश में विश्वस्तरीय संस्थानों की स्थापना के जरिये नवाचार इको-सिस्टम का सृजन तथा उसके समर्थन की परिकल्पना की गई है।

एआईसी, एआईएम, नीति आयोग की पहल है, ताकि नवाचार और उद्यमशीलता की भावना को बढ़ावा दिया जा सके। इसके साथ देश में स्टार्ट-अप और उद्यमियों के लिये एक सहायक इको-सिस्टम की रचना की जाये। हर एआईसी को पांच वर्ष के कालखंड में 10 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता है। वर्ष 2016 के बाद से एआईएम ने 18 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में 68 अटल इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित किये हैं, जो 2700 से अधिक स्टार्ट-अप की सहायता करते हैं।

एसीआईसी की परिकल्पना में स्टार्ट-अप और नवाचारी इको-सिस्टम को मद्देनजर रखते हुये देश के उन सभी हिस्सों को रखा गया है, जहां तक नवाचारी इको-सिस्टम या तो पहुंचा नहीं है या कम मात्रा में पहुंचा है। हर एसीआईसी को पांच वर्षों के समय में 2.5 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता है। एआईएम ने देशभर में 14 अटल कम्यूनिटी इनोवेशन केंद्र स्थापित किये हैं। ये सभी एआईसी और एसीआईसी भारत के स्टार्ट-अप और उद्यमशीलता को समृद्ध बनाने में प्रमुख भूमिका निभायेंगे तथा आत्मनिर्भर भारत की प्रतिध्वनि को गुंजायमान करेंगे।

आवेदनों का आह्वान करने के अवसर पर नीति आयोग के सीईओ परमेश्वरन अय्यर ने कहा, “विकास के लिये नवाचार एक अद्वितीय माध्यम है और नवाचार में तेजी लाने वाले माध्यम को सामाजिक उद्यमशीलता के साथ जोड़ा जाना चाहिये।” उन्होंने भारत के लिये नवोन्मेष करने और भारत से नवोन्मेष करने में देश के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के प्रधानमंत्री की परिकल्पना पर भी बल दिया।

एआईएम के मिशन निदेशक डॉ. चिन्तन वैष्णव ने अपने वक्तव्य में कहा, “राष्ट्र के रूप में पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के लिये स्टार्ट-अप इको-सिस्टम की तरफ से भरपूर सहयोग और समर्थन की जरूरत है और अटल इनोवेशन मिशन इसके लिये प्रतिबद्ध है। आज हम देखते हैं कि समावेशी इनक्यूबेशन पहलों पर कहीं ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था के सभी सेक्टरों को सुगमता मिलेगी।”

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