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सुस्त हो गई है कांग्रेस, उसमें सत्ता की भूख नहीं रही : हरीश रावत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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देहरादून. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस बहुत सुस्त पार्टी हो गई है. कांग्रेस में सत्ता की भूख नहीं हैं. आज बीजेपी ने हमारा स्थान ले लिया है.

हरीश रावत ने कहा, “हम जब तक सत्ता की भूख पैदा नहीं करेंगे…हमारा स्थान बीजेपी ने ले लिया है. हर स्तर पर…सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं. राज्य स्तर पर ग्राम स्तर पर उनके कार्यकर्ताओं ने हमारा काम ले लिया है. जब तक हम उन्हें उस काम से अलग नहीं करेंगे तब तक हम कैसे अपने गांव के..जिले के नेता हो पाएंगे. इसलिए मैंने कहा कि भूख को पैदा करने के लिए हमारे गठबंधन के साथी है वो मेहनत कर रहे हैं.

हरीश रावत ने कही ये बात
हरीश रावत ने कहा, इस समय में प्रत्येक कांग्रेसी को अपनी शक्ति को खड़ा करना है. हमारे पास साधन नहीं है…पार्टी के सामने बहुत सारी दिक्कतें खड़ी की गई है. सत्ता के द्वारा धर्मशक्ति और सत्ता शक्ति का दुरुपयोग किया जा रहा है. तो जब तक हम करो या मरो की शक्ति से चुनाव नहीं लड़ेंगे तब तक काम नहीं चलेगा.

कांग्रेस आलसी हो गई है के बयान पर कांग्रेस नेता ने कहा, हमें इसकी सत्यता को हमें स्वीकार करना पड़ेगा. बीजेपी जिस तरह सत्ता में रहकर सक्रिय है हमें उस अपेक्षा में सक्रिय नही पा रहे हैं. क्योंकि हमें उन्हें स्थान से हटाना है. उत्तराखंड में कांग्रेस में वो भूख दिख रही है, मुझे लगता है कांग्रेस सभी सीटों पर 2009 के नतीजों को दोहराएँगे. टिहरी में हमारी पार्टी लीड करते दिख रही है तो वहीं हरिद्वार सीट पर भी पार्टी मजबूती से लड़ रही है.

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पूर्व सीएम से जब रॉबर्ट वाड्रा के अमेठी से चुनाव लड़ने की इच्छा पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ये पार्टी को तय करना है. गांधी नेहरू परिवार को तय करना है कि कौन व्यक्ति है जो उनकी पारिवारिक सीट से चुनाव लड़ सकता है.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।