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पुंछ हमले में शामिल दो आतंकवादियों का स्केच जारी, अब तक 10 से अधिक गिरफ्तार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू. पुंछ में सुरनकोट के शशिधार क्षेत्र में वायु सेना के वाहनों पर हमले के बाद फरार आतंकियों की तलाश में बड़े पैमाने पर अभियान चल रहा है। सेना के पैरा कमांडो को भी क्षेत्र में उतारा गया है। सेना, पुलिस, सीआरपीएफ के संयुक्त अभियान में हमलास्थल से सटे 20 किमी के क्षेत्र को जवानों ने घेर रखा है। इसी कड़ी में सेना ने दो संदिग्ध आतंकवादियों के स्केच जारी किए हैं। जिनके बारे में माना जाता है कि वे पुंछ शाइस्तार आईएएफ वाहन हमले में शामिल थे।

पूछताछ के लिए 10 से अधिक लोगों को हिरासत में

हेलीकॉप्टर व ड्रोन से भी जंगल पर निगरानी रखी जा रही है। खोजी कुत्ते भी अभियान में शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने पूछताछ के लिए 10 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आनंद जैन, डीआइजी तेजेंदर सिंह, सेना और खुफिया विभाग के अधिकारी हालात पर नजर रखे हुए हैं।

150 से ज्यादा स्टील व तांबे की गोलियां दागी

उन्होंने कहा कि शाहसीतार, गुरसाई, सनई और शीनदारा टॉप समेत कई इलाकों में अभियान जारी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आतंकियों ने हमले में अमेरिकी निर्मित एम 4 कार्बाइन असाल्ट राइफल और एके 56 राइफल का इस्तेमाल किया। 150 से ज्यादा स्टील व तांबे की गोलियां दागी गई।

आशंका है कि हमले में तीन से चार आतंकी शामिल रहे हैं। गत शनिवार शाम को वायु सेना के वाहनों पर आतंकी हमले में एक जवान बलिदान और पांच घायल हुए थे। हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने 10 से अधिक लोगो को हिरासत में ले लिया है। उच्च अधिकारी लगातार उनसे पूछताछ कर रहे हैं। जडा वाली गली से बिजी तक सटे जंगली इलाकों को खंगाला जा रहा है। ताकि आतंकी जंगलों से घाटी या राजौरी देरा गली न जा सकें।

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ड्रोन से आ रहे हथियार

क्षेत्र में आतंकियों के पास हथियारों की कमी न हो इसके लिए सीमा पार से ड्रोन से हथियार भेजे जा रहे हैं। कुछ ड्रोन सुरक्षाबल खदेड़ देते हैं तो कुछ हथियार गिराने में कामयाब हो जाते हैं। आतंकी उन्हीं हथियारों का उपयोग राजौरी व पुंछ में कर रहे हैं।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।