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भारतीय सेना ने राजौरी कैंप पर आतंकवादियों के हमले को किया विफल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू. जम्‍मू-कश्‍मीर के राजौरी में सेना के कैंप पर आतंकी हमला हुआ है. इस हमले को सेना के जवानों ने विफल कर दिया, जिससे आतंकियों को भागना पड़ा. सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक, इस आतंकी हमले के दौरान एक जवान के घायल होने की सूचना है. हमला राजौरी के मंजकोट में सेना के कैंप पर हुआ है. सूत्रों ने बताया कि आतंकियों ने कैंप को टारगेट किया था. सेना ने अब हमला करने वाले आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है. जम्मू में हाल में बीते महीने हुई तीन बड़ी आतंकी घटनाओं, और राजौरी में हुए आतंकी हमले को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के हाथ एक महत्वपूर्ण इनपुट लगा है.

सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगा महत्वपूर्ण इनपुट

खुफिया एजेंसी के सूत्रों का दावा है कि इन सभी आतंकी वारदातों के पीछे लश्कर-ए-तैयबा के ट्रेंड आतंकी साजिद जट्ट का हाथ है. साजिद जट्ट फिलहाल पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अपना बेस कैम्प बनाकर रह रहा है. पहले वो पीओके (POK) में भी लंबे वक्त तक एक्टिव था. साजिद जट्ट के साथ भारतीय मूल की उसकी पत्नी भी इस्लामाबाद में रह रही है. साजिद जट्ट फिलहाल लश्कर के लिए रिक्रूटमेंट का काम संभाल रहा है, और ट्रेंड आतंकियों को सीमा पार से भारत भेजने के लश्कर के टॉस्क को पूरा करने में लगा हुआ है

लश्कर का ऑपरेशनल कमांडर साजिद जट्ट!

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साजिद को लश्कर का ऑपरेशनल कमांडर भी बताया जाता है. आतंकी घटनाओं के लिए टेरर फंडिंग का जिम्मा भी लश्कर ने साजिद को सौप रखा है. घाटी में पिछले कुछ सालों में हुए आतंकी हमलों में साजिद जट्ट का हाथ बताया गया है. खुफिया एजेंसियों को शक है कि इसका एक साथी कासिम जम्मू-कश्मीर में एक्टिव है, जिसकी सरगर्मी से तलाश जारी है. साजिद जट्ट पर एनआईए (NIA) ने 10 लाख का इनाम भी घोषित किया हुआ है. NIA की मोस्ट वांटेड लिस्ट में उसका नाम लिखा गया है,उसमें लिखा है कि सफीउल्लाह साज़िद जट गांव शंगामंगा, जिला कसूर, पंजाब, पाकिस्तान का रहने वाला है. इसके आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और टीआरएफ से गहरे ताल्लुक हैं.

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।