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खेत में खुदाई के दौरान मिले 200 वर्ष पुराने हथियार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. यूपी के शाहजहांपुर जिले में ग्रामीण वालों को खेत में जुताई में कई साल पुराने हथियारों का जखीरा मिला है. जानकारी के मुताबिक ये सभी हथियार 18वीं सदी के हैं. गांवों वालों ने बताया कि खेत में जुताई का काम चल रहा था, तभी जमीन के अंदर हल से किसी लोहे से टकराने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद वहां खुदाई की गई. गांव वालों ने बताया कि जुताई के दौरान उन्हें प्राचीन तलवार, खंजर, बरछी और बंदूकें मिलीं. हथियारों के मिलते ही स्थानीय पुलिस और राजस्व विभाग के लोग को जानकारी दी. पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंच कर हथियारों को कब्जे में ले लिया है. साथ ही पुरातत्व विभाग को भी सूचना दी गई. इसके अलावा तिलहर विधायक सलोना कुशवाह भी मौके पर पहुंच गईं.

200 साल पुरानी बताई जा रही हैं चीजें

शाहजहांपुर के ढकीया तिवारी गांव के बाबू राम ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने जेसीबी से खेत की मिट्टी निकलवाई थी. ऐसे में मिट्टी निकलने के बाद पहली बार खेत जोत रहे थे. इस दौरान उन्हें हल से किसी लोहे के टकराने की आवाज सुनाई थी. ऐसे में जब उन्होंने ध्यान से देखा तो जमीन के अंदर से पुराने समय की तलवार, खंजर, बरछी, और बंदूकें निकली. जानकारों के मुताबिक ये हथियारों को 200 साल पुराना बताया जा रहा है.

18वीं सदी के हो सकते हैं हथियार

मामले को लेकर इतिहासकार विकास खुराना बताते हैं कि ये हथियार 18वीं सदी के हो सकते हैं क्यों कि भारत में बंदूकों का उपयोग अपने रीजन में 18वीं सदी को शुरू हुआ. बाबर के समय में भारत में बंदूक लाई गई थी. फिलहाल, इसकी स्टडी के लिए डीएम से मांग की गई है. जानकारी के मुताबिक जो बंदूक मिली है उसकी लड़की को दीमक खा गई है और सिर्फ नाल बची है. इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के कई गांवो में खुदाई के दौरान कई सालों पुरानी चीजें निकल चुकी हैं. जानकारों के मुताबिक ये सभी चीजें मुगल के जमाने के हैं.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।