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कोई मतभेद नहीं है, मंत्रिमंडल में शामिल होने पर बाद में सोचेंगे : अजित पवार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद आज नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। इस बार एनडीए के अन्य दलों के साथ मिलकर केंद्र में सरकार बन रही है। एनडीए के अन्य दलों में ही एनसीपी भी शामिल है। ऐसे में एनसीपी के भी सांसदों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना है। इससे पहले एनसीपी में विवाद की बात भी सामने आ रही थी, हालांकि अजित पवार, सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने इन अफवाहों का खंडन किया है।

शपथ ग्रहण समारोह में होंगे शामिल

इस मामले पर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने कहा, ‘अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ हमारी बैठक हुई है। प्रफुल्ल पटेल इससे पहले केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। हमें स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री लेना सही नहीं लगा, इसलिए हमने उन्हें (बीजेपी) बताया कि कुछ दिनों तक इंतजार करने के लिए तैयार हैं, लेकिन हम एक कैबिनेट मंत्रालय चाहते हैं। हम NDA के साथ हैं और आगे विधानसभा चुनाव में भी NDA के साथ रहेंगे।’ एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने आगे कहा, ‘आज हमारे पास एक लोकसभा और एक राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन अगले 2-3 महीनों में राज्यसभा में हमारे कुल 3 सदस्य होंगे और संसद में हमारे सांसदों की संख्या 4 होगी। हमें एक (कैबिनेट मंत्रालय) सीट दी जानी चाहिए। हम आज शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने जा रहे हैं।’

‘कोई फूट नहीं है’

वहीं एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने इस पर कहा, ‘किसी तरह की कोई फूट नहीं है। सबने (अजित पवार, सुनील तटकरे) मिलकर यही फैसला लिया है कि मुझे केंद्रीय मंत्रिमंडल में जाना चाहिए।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘कल रात हमें बताया गया कि हमारी पार्टी को स्वतंत्र प्रभार वाला एक राज्य मंत्री का पद मिलेगा। मैं पहले केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री था, इसलिए यह एक डिमोशन होगा। हमने भाजपा नेतृत्व को सूचित कर दिया है और उन्होंने पहले ही हमें कहा है कि बस कुछ दिनों तक इंतजार करें, वह इस पर उपचारात्मक कदम उठाएंगे।” वहीं महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष सुनील तटकरे ने भी पद को लेकर चल रहे विवाद की खबरों का खंडन किया है।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।