शुक्रवार, सितंबर 18 2026 | 02:51:21 AM

मंत्री न बनाये जाने से भाजपा सांसद रमेश जिगाजिनागी नाराज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

बेंगलुरू. कर्नाटक से भारतीय जनता पार्टी के सांसद और दलित नेता रमेश जिगाजिनागी ने पार्टी के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई है। उन्होंने दावा किया है कि ज्यादातर केंद्रीय मंत्री ऊंची जातियों से हैं और दलितों को दरकिनार किया गया है। बता दें कि 72 साल के रमेश जिगाजिनागी 7 बार सांसद रहे हैं और सूबे के कद्दावर दलित नेताओं में गिने जाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में विजयपुरा सीट से जीत दर्ज करने वाले जिगाजिनागी 2016 से 2019 तक राज्य मंत्री भी रहे हैं। BJP में शामिल होने से पहले वह जनता पार्टी, जनता दल, लोक शक्ति और जनता दल यूनाइटेड में रह चुके हैं।

‘लोगों ने कहा था ये दलित विरोधी पार्टी है’

2024 के लोकसभा चुनावों के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह न बना पाने पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए जिगाजिनागी ने कहा, ‘मेरे लिए मंत्री पद जरूरी नहीं है। मेरे लिए मेरी जनता का समर्थन जरूरी है। जीतने के बाद मैं जब लोगों के बीच आया तो उन्होंने मुझे बहुत डांटा। उन्होंने कहा कि इस पार्टी में शामिल होने से पहले मुझे मालूम होना चाहिए थी कि ये दलित विरोधी पार्टी है। लोगों ने कहा था कि मुझे इस पार्टी में शामिल नहीं होना चाहिए। ये जनता की अपेक्षा थी कि मुझे पद दिया जाए। आप लोग ही बताइए कि ये कैसा न्याय है, या अन्याय है?’

‘इस फैसले से मुझे बहुत पीड़ा हुई है’

जिगाजिनागी ने अपने बयान में आगे कहा, ‘पूरे दक्षिण भारत में दलित नेता के रूप में मैं अकेला जीत कर आया। अब तक 7 चुनाव जीता हूं। सभी अपर कास्ट वाले मंत्री बने। इसका मतलब क्या यह है कि दलितों ने BJP को वोट नहीं किया? मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि इस फैसले से मुझे बहुत पीड़ा हुई है।’ बता दें कि जिगाजिनागी ने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1998 में लोक शक्ति पार्टी के टिकट पर जीता था। उसके बाद से वह लगातार 7 बार संसद में पहुंच चुके हैं। 1983 में उन्होंने अपना पहला विधानसभा चुनाव जीता था और आगे चलकर 3 बार विधायक भी रहे थे।

साभार : इंडिया टीवी

- Advertisement -

भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

https://www.amazon.in/dp/9392581181/

https://www.flipkart.com/bharat-1857-se-1957-itihas-par-ek-drishti/p/itmcae8defbfefaf?pid=9789392581182

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।