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एकनाथ शिंदे की विधायक यामिनी जाधव ने बांटे बुर्के

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. महाराष्ट्र में शिवसेना विधायक यामिनी जाधव की ओर से मुस्लिम महिलाओं को बुर्का बांटने का एक वीडियो वायरल हुआ. इस पर सत्तारूढ़ सहयोगी बीजेपी ने कहा कि यह उनका विशेषाधिकार है, लेकिन वह इस तरह की तुष्टीकरण की राजनीति को स्वीकार नहीं करती. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी की विधायक भायखला निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं, जहां अच्छी खासी मुस्लिम आबादी है.

एक वीडियो में यामिनी जाधव बुर्का बांटती नजर आ रही हैं, जबकि दूसरे वीडियो में वह कह रही हैं कि वितरण आगामी राज्य चुनावों को ध्यान में रखकर नहीं किया जा रहा है. शिवसेना विधायक यामिनी जाधव ने वीडियो में कहा कि अगर विपक्ष को लगता है कि बुर्का, हिजाब बांटना यामिनी जाधव या यशवंत जाधव (उनके पति और शिवसेना नेता) की ओर से मुसलमानों का विश्वास हासिल करने के लिए किया जा रहा है, तो यह कोई राजनीतिक जुमला नहीं है. बार-बार कॉल करने के बावजूद यामिनी और यशवंत जाधव किसी भी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सके. बीजेपी मुंबई के अध्यक्ष आशीष शेलार ने कहा कि वह जो चाहे करें, लेकिन बीजेपी बुर्का बांटने जैसी तुष्टीकरण की राजनीति को स्वीकार नहीं करती. प्रतिद्वंद्वी शिवसेना (यूबीटी) की प्रवक्ता सुषमा अंधारे ने कहा कि जाधव को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वह दलबदलू विधायकों के समूह से हैं जो अन्यथा हिंदुत्व की बात करते रहते हैं.

लोकसभा चुनाव में मिली थी हार

दिलचस्प बात यह है कि मुंबई की भायखला विधानसभा सीट दक्षिण मुंबई लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. इस लोकसभा क्षेत्र से यूबीटी सेना के अरविंद सावंत ने जीत दर्ज की थी और उन्हें भायखला इलाके के अल्पसंख्यक वोट बड़ी संख्या में मिले थे. वहीं शिंदे गुट की ओर चुनाव मैदान में भायखला से विधायक यामिनी जशवंत जाधव थीं, जोकि पहले उद्धव गुट में थीं, लेकिन बाद में शिंदे सेना में शामिल हो गईं थीं. यामिनी जाधव लोकसभा का चुनाव तो हारी हीं, उन्हें अपने इलाके में भी हार का सामना करना पड़ा था. बता दें अरविंद सावंत ने यामिनी जाधव को 50 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था.

साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।