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आरजेडी ने कांग्रेस और वाम दलों के लिए छोड़ी सिर्फ 10 सीटें, बिगड़ सकता है गठबंधन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार में भी सियासी दलों ने कमर कस ली है. प्रदेश में महागठबंधन के दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर अभी पूरी तरह से सहमति नहीं बन पाई है. आरजेडी ने महागठबंधन में 30 सीटों पर दावा ठोका है. सूत्रों के अनुसार लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी बिहार में जेडीयू की हर सीट पर अपना उम्मीदवार उतारना चाहती है. जानकारी के मुताबिक आरजेडी खुद यहां 30 सीटों पर चुनाव लड़ने के मूड में है. सूत्रों के मुताबिक आरजेडी कांग्रेस को सिर्फ 7 सीट देना चाहती है. बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की तरफ से 15 सीटों पर दावेदारी की जा रही है. इसके साथ ही बिहार में आरजेडी वामदलों के लिए 3 सीट छोड़ना चाहती है.

बिहार में कुल 40 सीटें

बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं. बिहार में लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी ने 30 सीटों पर अपनी दावेदारी की है. सूत्रों के मुताबिक आरजेडी अपने फॉर्मूले के तहत कांग्रेस को सिर्फ 7 सीट देना चाहती है. वहीं तीन सीट लेफ्ट पार्टियों को देने का फॉर्मूला है. हालांकि, अभी सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस और आरजेडी के बीच सहमति नहीं बन पाई है. बताया जा रहा है कि कांग्रेस बिहार में 15 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी की थी.

बिहार में साल 2019 चुनाव के नतीजे क्या रहे?

2019 के लोकसभा चुनाव में NDA ने यहां 39 सीटों पर जीत का परचम लहराया था. 2019 चुनाव के दौरान बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू, बीजेपी और एलजेपी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. बिहार में नीतीश कुमार की JDU को 16 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. वहीं, बीजेपी को 17 सीटों पर सफलता मिली थी. इसके अलावा एलजेपी ने 3 सीटों पर जीत हासिल की थी. साथ ही एक सीट कांग्रेस के खाते में गई थी. नीतीश कुमार एक बार फिर से आरजेडी से अलग होकर बीजेपी के साथ चुनाव मैंदान में हैं.

साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।