पटना । सोमवार, 13 जुलाई 2026
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की सियासी सरगर्मी के बीच बिहार कांग्रेस के भीतर एक नई योजना को लेकर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी की नई जनसहभागिता और सदस्यता पहल ‘सृजन साथी’ (Srijan Sathi Scheme) को लेकर वरिष्ठ नेताओं और प्रदेश नेतृत्व के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं। ₹50 के योगदान से शुरू हुई यह योजना अब कांग्रेस के भीतर ही भारी असंतोष और चर्चा का विषय बन चुकी है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर ‘सृजन साथी’ योजना क्या है, पार्टी के वरिष्ठ नेता इस पर क्यों आपत्ति जता रहे हैं और इस पूरे विवाद पर प्रदेश अध्यक्ष का क्या कहना है।
क्या है बिहार कांग्रेस की ‘सृजन साथी’ योजना?
बिहार कांग्रेस द्वारा शुरू की गई ‘सृजन साथी’ एक ऐसी संगठनात्मक और डिजिटल पहल है जिसका मुख्य उद्देश्य आम जनता और जमीनी कार्यकर्ताओं को सीधे कांग्रेस संगठन से जोड़ना है।
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आर्थिक सहयोग और पंजीकरण: इस योजना के तहत कोई भी समर्थक या आम नागरिक ₹50 का छोटा आर्थिक योगदान देकर ‘सृजन साथी’ के रूप में अपना डिजिटल पंजीकरण करा सकता है।
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पहल का उद्देश्य: नेतृत्व का दावा है कि इस छोटे-छोटे योगदान के जरिए पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों को वित्तीय और जमीनी मजबूती मिलेगी।
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पदों के लिए ‘सृजन साथी’ का टारगेट: पार्टी सूत्रों और आंतरिक पत्रों के अनुसार, इस योजना को सांगठनिक नियुक्तियों से भी जोड़ा गया है। मसलन, प्रदेश उपाध्यक्ष पद की सिफारिश के लिए 3,000 सृजन साथी, महासचिव के लिए 2,000, सचिव के लिए 1,000 और जिला स्तरीय पदाधिकारियों के लिए 200 सृजन साथियों का पंजीकरण कराना अनिवार्य बताया जा रहा है।
वरिष्ठ नेताओं ने क्यों उठाए ‘सृजन साथी’ पर सवाल?
जैसे ही यह योजना सामने आई, बिहार कांग्रेस के कई कद्दावर और वरिष्ठ नेताओं ने इसके तौर-तरीकों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज करानी शुरू कर दीं। नेताओं के विरोध के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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आंतरिक चर्चा की कमी: वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि इतनी बड़ी और नई व्यवस्था लागू करने से पहले प्रदेश कार्यकारिणी या कोर कमेटी के भीतर कोई व्यापक विचार-विमर्श नहीं किया गया।
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पारदर्शिता पर सवाल: कार्यकर्ताओं और नेताओं का कहना है कि इस योजना के तहत इकट्ठा होने वाली धनराशि का उपयोग कहाँ और कैसे होगा, इसे लेकर कोई स्पष्ट नियमावली या पारदर्शिता सामने नहीं रखी गई है।
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योग्यता बनाम आर्थिक क्षमता: पार्टी के भीतर एक धड़े का यह भी मानना है कि सांगठनिक नियुक्तियों को ‘सृजन साथी’ की संख्या (यानी ₹50 के कलेक्शन) से जोड़ने से निष्ठावान कार्यकर्ताओं के बजाय आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को तवज्जो मिलने का खतरा बढ़ जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष की सफाई: “यह सिर्फ एक पायलट प्रोजेक्ट है”
पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और विवाद को देखते हुए बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्थिति को संभालते हुए स्पष्ट किया कि ‘सृजन साथी’ योजना अभी अपने पूर्ण रूप में लागू नहीं हुई है, बल्कि यह केवल एक पायलट प्रोजेक्ट (Pilot Project) है।
प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, इस प्रयोगात्मक चरण से मिलने वाले अनुभवों और जमीनी फीडबैक के आधार पर ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अगर जरूरत पड़ी, तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिलने वाले सुझावों के अनुसार इस योजना के नियमों में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
इस विवाद के राजनीतिक मायने
बिहार में राजनीतिक दल जब चुनावों के लिए अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं, ऐसे समय में कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी के भीतर आंतरिक गुटबाजी और मतभेद का बाहर आना रणनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है। एक तरफ जहां पार्टी नेतृत्व इसे संगठन विस्तार का एक आधुनिक और डिजिटल प्रयोग बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इस आंतरिक कलह को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध सकते हैं। अब देखना यह होगा कि पायलट चरण के बाद कांग्रेस इस योजना को ठंडे बस्ते में डालती है या आवश्यक संशोधनों के साथ इसे आगे बढ़ाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. ‘सृजन साथी’ योजना किस पार्टी द्वारा शुरू की गई है?
Ans: यह योजना बिहार में कांग्रेस पार्टी (बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी) द्वारा शुरू की गई है।
Q2. ‘सृजन साथी’ बनने के लिए कितने रुपये का योगदान देना होता है?
Ans: इस योजना के तहत पंजीकरण कराने के लिए समर्थकों से ₹50 का सहयोग लिया जा रहा है।
Q3. बिहार कांग्रेस के नेताओं को इस योजना से क्या आपत्ति है?
Ans: वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि योजना शुरू करने से पहले संगठन में आम सहमति नहीं बनाई गई और सांगठनिक पदों को पैसे के कलेक्शन (सृजन साथी टारगेट) से जोड़ना सही नहीं है।
Q4. क्या ‘सृजन साथी’ योजना पूरे बिहार में पूरी तरह लागू हो चुकी है?
Ans: नहीं, बिहार कांग्रेस नेतृत्व के अनुसार वर्तमान में यह केवल एक पायलट प्रोजेक्ट (प्रायोगिक परियोजना) के रूप में चलाई जा रही है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध समाचार सूत्रों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर आधारित है। योजना के नियमों और सांगठनिक निर्णयों में बदलाव का अधिकार संबंधित राजनीतिक दल के पास सुरक्षित है।
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