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मुंगेर में 13 सूत्री मांगों को लेकर अनशन पर बैठे कृष्णा मंडल की तबीयत बिगड़ी, डॉक्टरों की टीम पहुंची

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read
मुंगेर | गुरुवार, 27 अगस्त 2026
बिहार के मुंगेर शहर स्थित भगत सिंह चौक के पास 13 सूत्री मांगों को लेकर 25 अगस्त से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा मंडल की स्थिति चौथे दिन अचानक बिगड़ गई। लगातार निराहार रहने के कारण उनके शरीर में अत्यधिक कमजोरी और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के लक्षण पाए गए हैं।
अनशन स्थल पर पहुंचे चिकित्सा पदाधिकारी
तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही स्थानीय चिकित्सा पदाधिकारी और डॉक्टरों की टीम तुरंत अनशन स्थल पर पहुंची। स्वास्थ्य जांच के बाद चिकित्सकों ने बताया कि कई दिनों तक भोजन न करने से शरीर में न्यूट्रिएंट्स और पानी की भारी कमी हो गई है। डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक चिकित्सा सहायता प्रदान की है तथा अनशन समाप्त कर आराम करने की सलाह दी है।
प्रमुख मांगें और सामाजिक प्रतिक्रिया
अनशनकारी कृष्णा मंडल की 13 सूत्री प्रमुख मांगों में:
  • कथित ‘लव जिहाद’ और अवैध धर्म परिवर्तन पर कड़ा प्रतिबंध लगाने की मांग।
  • स्थानीय अल्पसंख्यक छात्रावास को बंद करने की मांग।
अनशन के चौथे दिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय सामाजिक संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। विभिन्न संगठनों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर मांगों पर त्वरित वार्ता करने और समाधान निकालने की अपील की है।
सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम
अनशन स्थल पर किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1: कृष्णा मंडल मुंगेर में अनशन पर क्यों बैठे हैं?
उत्तर: कृष्णा मंडल कथित ‘लव जिहाद’, धर्म परिवर्तन रोकने और अल्पसंख्यक छात्रावास बंद कराने जैसी 13 सूत्री मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं।
प्रश्न 2: मुंगेर में अनशन किस स्थान पर चल रहा है?
उत्तर: यह आमरण अनशन मुंगेर के प्रसिद्ध भगत सिंह चौक के पास आयोजित किया जा रहा है।
Disclaimer:
इस लेख में प्रयुक्त ‘लव जिहाद’ शब्द अनशनकारी की मांगों एवं घटनाक्रम के संदर्भ को दर्शाने के लिए किया गया है। इसे किसी आधिकारिक सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।