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उमर अब्दुल्ला चाहते हैं, हटे जमात-ए-इस्लामी पर से प्रतिबंध

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू. नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और बारामूला लोकसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार उमर अब्दुल्ला ने जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने केंद्र से जमात-ए-इस्लामी पर लगे बैन को हटाने की मांग की है ताकि आगामी विधानसभा चुनावों में वो हिस्सा ले सके. केंद्र ने साल 2019 में जमात-ए-इस्लामी पर बैन लगा दिया था जिसे इसी साल आगेल पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया.

एनसी के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा, ”मैंने इस बात की मांग की है कि जमात-ए-इस्लामी पर से बैन हटा लेना चाहिए. जमात-ए-इस्लामी को आगामी विधानसभा चुनावों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए. अभी तक हम ये सुन रहे थे कि चुनावों में कहीं न कहीं वो अलग-अलग उम्मीदवारों की मदद करने की बात कर रहे थे, अब उनका अपना उम्मीदवार होगा.

गृहमंत्री शाह के दौरे पर क्या बोले उमर अब्दुल्ला

बारामूला लोकसभा सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय गृहमंत्री के श्रीनगर दौरे को लेकर भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, ”जहां तक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के यहां आने की बात है. क्या ये आपलोगों को अजीब नहीं लगता है कि जहां उनका अपना कोई उम्मीदवार नहीं है, जहां वो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. वो कैंपेन छोड़कर दो दिन के लिए केंद्रीय गृहमंत्री यहां आ रहे हैं. शायद ये इस बात का नतीजा है कि वो जान गए हैं कि श्रीनगर की सीट आगा रुहुल्ला मेहदी जीत गए हैं.

उन्होंने कहा कि इंशा अल्लाह लोगों का समर्थन हमारे साथ है. मैं उम्मीद कर रहा हूं कि अनंतनाग और बारामूला की बाकी दो सीटें हैं, उसपर भी नेशनल कॉन्फ्रेंस कामयाबी हासिल करेगी. नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने पीपुल्स कॉन्फ्रेंस को लेकर पूछे गए सवालों का भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि कल तक पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन जीतने की बात कर रहे थे चुनाव. हालांकि, अब वह कहते हैं कि उनकी जीत से ज्यादा मेरी हार जरूरी है. उन्होंने अपनी विफलता स्वीकार कर ली है.”

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जम्मू कश्मीर में लोकसभा की कुल 5 सीटें हैं. बारामूला लोकसभा सीट पर 20 मई को वोटिंग होगी. वहीं, अनंतनाग-राजौरी संसदीय सीट पर 25 मई को मतदान होगा. श्रीनगर सीट पर चौथे चरण में 13 मई को वोट डाले गए थे.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।