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जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के पहले चरण में शाम 5 बजे तक हुआ 58.19% मतदान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जम्मू. जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में पहले फेज के लिए बुधवार शाम 6 बजे वोटिंग खत्म हो गई। आज 7 जिलों की 24 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ। शाम 5 बजे तक का मतदान प्रतिशत 58.19% रहा। फाइनल आंकड़ा आना बाकी है। शाम 5 बजे तक आए आंकड़ों के मुताबिक, किश्तवाड़ में सबसे ज्यादा 77.23% और पुलवामा में सबसे कम 43.87% वोटिंग हुई। आज 23.27 लाख वोटर्स को मतदान करना था।

बिजबेहरा विधानसभा सीट से पीडीपी की प्रत्याशी इल्तिजा मुफ्ती ने वोट डाला, वे पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी हैं। किश्तवाड़ से बीजेपी की कैंडिडेट शगुन परिहार ने भी वोट डाला। शगुन ने आरोप लगाया था कि किश्तवाड़ के बागवान मोहल्ले में बिना पहचान पत्र के वोट डलवाए गए। इसके बाद माहौल गर्म हो गया, जिसके चलते कुछ देर वोटिंग रुकी रही।

पहले फेज की वोटिंग को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले 35 हजार से ज्यादा विस्थापित कश्मीरी पंडितों ने भी वोट डाले। उनके लिए कुल 24 स्पेशल बूथ बनाए गए थे। दिल्ली 4, जम्मू 19 और उधमपुर में 1 बूथ था। 2014 में पहले फेज में 22 सीटें पर हुई थी वोटिंग साल 2014 के विधानसभा चुनाव के फर्स्ट फेज में दक्षिण कश्मीर की 22 सीटों पर चुनाव हुए थे। तब 11 सीटों पर महबूबा मुफ्ती की पार्टी PDP को जीत मिली थी। भाजपा और कांग्रेस ने 4-4 सीटें जीती थीं। वहीं फारूक अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस को 2 और CPI (M) को एक सीट मिली थी।

2024 लोकसभा चुनाव के लिहाज से बात करें तो नेशनल कॉन्फ्रेंस 11 सीट, PDP 5, कांग्रेस 4 और भाजपा 3 पर आगे थी। 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 9, नेशनल कॉन्फ्रेंस 6, PDP 4 और भाजपा 2 सीटों पर आगे रही। 2014 में नेशनल कॉन्फ्रेंस 11, PDP 5, कांग्रेस और भाजपा को तीन-तीन सीटों पर बढ़त मिली। 90 सीटों पर 3 फेज में हो रही वोटिंग जम्मू-कश्मीर की 90 विधानसभा सीटों पर फर्स्ट फेज में 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को तीन फेज में वोटिंग होगी। नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 2014 चुनाव में PDP ने सबसे ज्यादा 28 और भाजपा ने 25 सीटें जीती थीं। दोनों पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाई थी।

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साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।