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आदित्य ठाकरे के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं मिलिंद देवड़ा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव 2024 को लेकर तैयारियां जोर-शोर से जारी है। सभी दल अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर रहे हैं। चुनाव की तैयारियों के बीच मुंबई की वर्ली सीट का मुकाबला काफी रोचक हो गया है। इस सीट से एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना अपने राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा को मैदान में उतार सकती है। बता दें कि वर्ली सीट से शिवसेना यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे चुनाव लड़े रहे हैं।

मिलिंद देवड़ा ने भी दिए संकेत

शिवसेना के राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा ने भी वर्ली सीट से आदित्य ठाकरे के ख़िलाफ चुनाव लड़ने के संकेत दे दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक मिलिंद देवड़ा की उम्मीदवारी का ऐलान आज शुक्रवार को ही हो सकता है। आज देर रात तक एकनाथ शिंदे की शिवसेना के उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट सामने आ सकती है। शिंदे शिवसेना महायुति में करीबन 80 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। X पर एक पोस्ट में  सांसद मिलिंद देवड़ा ने कहा है कि “मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का मानना है कि वर्ली और वर्लीकरों के लिए न्याय में बहुत देर हो चुकी है। हम साथ मिलकर आगे का मार्ग तैयार कर रहे हैं और जल्द ही इस बारे में अपना दृष्टिकोण साझा करेंगे। अब वर्ली की बारी है!”

चुनाव मंच में आए थे मिलिंद देवड़ा

गुरुवार को मिलिंद देवड़ा एक प्राइवेट टीवी चैनल के चुनाव मंच कार्यक्रम में शामिल हुए थे। मिलिंद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अतीत है। कांग्रेस पार्टी देश के लिए सेंट्रिस्ट एजेंडा देश के सामने रखते थे। अफसोस की बात है कि कांग्रेस पार्टी आज एक्स्ट्रीम पार्टी बन चुकी है। आज मुंबई और महाराष्ट्र में जिस तरीके से सबको एक साथ लेकर शिंदे साहब चल रहे हैं। उनके वर्किंग स्टाइल को देखने के बाद, मैंने शिंदे साहब के नेतृत्व में शिवसेना ज्वाइन किया। मिलिंद ने कहा था कि आज राष्ट्रीय स्तर पर मोदी जी और महाराष्ट्र में शिंदे साहब विजन दे रहे हैं। नौजवान पीढ़ी ने लगातार तीन बार मोदी जी को जिताया है।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।