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कांवड़ यात्रा को देखते हुए पूरी तरह बंद किया गया हाईवे एनएच-58

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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देहरादून. उत्तराखंड से बड़ी खबर सामने आ रही है. यहां कांवड़ियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने दिल्ली-देहरादून हाईवे बंद कर दिया. हाईवे पर दोनों ओर के रास्ते कांवड़ियों के लिये आरक्षित रहेंगे. 22 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू होने के बाद यूपी और उत्तराखंड की सरकारों ने अलग-अलग डायवर्जन प्लान लागू किये हैं. ऐसे में अब दिल्ली देहरादून हाईवे (NH-58) सोमवार से लेकर 2 अगस्त तक के लिये बंद कर दिया है.

बीते 22 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू हो गई थी. इसमें कांवड़ियों की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय स्तर पर डायवर्जन प्लान लागू कर दिया गया था. मध्यम वाहनों पर 25 जुलाई से प्रतिबंध लगा दिया गया था. सावन का दूसरा सोमवार 29 जुलाई यानी आज है. ऐसे में कांवड़ियों की संख्या ऐसे में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है. हरिद्वार से जल लेकर आने वालों के साथ ही दिल्ली-एनसीआर से कांवड़ लेने जाने वाले कांवड़ियों की संख्या में वृद्धि होने का अनुमान है.. इसे ध्यान में रखते हुए 29 जुलाई से NH-58 दिल्ली-दून हाईवे को पूरी तरह बंद कर दिया गया है.

मेरठ एसपी ट्रैफिक के राघवेंद्र कुमार मिश्रा के मुताबिक दिल्ली देहरादून हाईवे पर सोमवार से जाने वाले वाहन अब तय किये गए डायवर्जन प्लान के अनुसार अपने गंतव्य की ओर बढ़ेंगे. गौरतलब है कि डाक कांवड़ उमड़ने के साथ ही अब हाईवे पर ऑटो रिक्शा या ई-रिक्शा नहीं दौड़ सकेंगे. रविवार से लेकर कांवड़ मेले के खत्म होने तक हाईवे पर यही व्यवस्था लागू रहेगी. पुलिस ने उत्तरी हरिद्वार आने जाने के लिए शटल सेवा का इंतजाम भी किया है.

कांवड़ मेला अब अपने चरम पर है. भारी भीड़ को देखते हुए नेशनल हाईवे 58 बंद करने का फैसला लिया गया है. हरिद्वार के अलावा नीलकंठ से लेकर गोमुख तक कांवड़िये वापस लौटते हैं. इस वजह से पूरे हाईवे पर जाम की स्थिति बन जाती है. उधर, हरिद्वार में भी डायवर्जन प्लान लागू किया गया है. वहां के मुख्य बस स्टैंड को बंद कर अस्थायी बस स्टैंड बनाए गए हैं.

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साभार : न्यूज़18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।