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नेपाल के फतुआ बांध टूटने से बिहार में बाढ़ का कहर, डूबे दर्जनों गांव

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. मोतिहारी से सटे नेपाल में फतुआ बांध टूट जाने से पूर्वी चम्पारण जिला के ढाका प्रखंड अन्तर्गत हीरापुर, गुरहनवा, वीरता टोला, भवानीपुर, बलुआ गुआबारी, महंगुआ, दोस्तियां, महुआवा सहित दर्जनों गांव में बाढ़ का पानी फैल चुका है। शनिवार के देर रात से बारिश थमने के बाद नदी का जल स्तर अभी बढ़ ही रहा है। नदी के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए एसडीओ निशा ग्रेवाल ने जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को निर्देशित किया है कि तटबंध पर हुए रैन कट को ठीक किया जाए। इधर, जिला प्रशासन के अधिकारी द्वारा सरकारी स्तर पर बलुआ में बनाये गये आश्रय स्थल का निरीक्षण कर संभावना के प्रति प्रशासनिक टीम को सचेत रहने का निर्देश दिया है।

डूबने से एक की मौत

इधर सुगौली थाना क्षेत्र अंतर्गत माली पंचायत में एक वृद्ध की बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई। सुगौली पुलिस ने उनकी पहचान बेल टोला निवासी 65 वर्षीय अनुज सहनी के रूप में की है। परिजनों का कहना है कि वह खेत देखने जा रहे थे। चारों तरफ बाढ़ का पानी पूरे इलाके में फैल हुआ है। अचानक गहरे गड्ढे में चले गए और डूबने से उनकी मौत हो गई।

मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है

इधर, उत्तर बिहार के प्रमुख नदियों में गंडक नदी के जल स्तर पर वृद्धि को लेकर मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। तटबंध पर निगरानी के साथ कटाव की क्षेत्र में विशेष नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही तटबंध के प्रत्येक एक किलोमीटर पर कर्मी की प्रतिनियुक किया गया। इसके साथ ही जिला नियंत्रण से किया जा रहा है। कंट्रोल रूम से वेस्ट एसडीएम श्रेया श्री ने यह जानकारी दी। एसडीएम ने कहा कि बाल्मीकि नगर बराज से गंडक नदी में छोड़े गए पानी के बाद हमलोग अलर्ट मोड पर काम कर रहे हैं। अभी स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। जिले के तीन प्रखंड साहेबगंज सरैया और पारू गंडक नदी के बाढ़ से होने वाले प्रभावित क्षेत्र हैं। इन इलाकों में क्षेत्र के सभी अंचल अधिकारियों को निगरानी का निर्देश दिया है।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।