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आईआरसीटीसी ने प्रीमियम ट्रेनों में चुपके से हटाया “नो फूड ऑप्शन” का विकल्प

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. वंदे भारत, शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में सफर करने वालों के लिए एक नई दिक्कत सामने आई है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने चुपचाप इन ट्रेनों की टिकट बुकिंग प्रक्रिया में बड़ा बदलाव कर दिया है, जिससे “नो फूड ऑप्शन” यानी बिना खाना लिए टिकट बुक करने का ऑप्शन हटा दिया गया है। इस फैसले ने यात्रियों को हैरान कर दिया है, क्योंकि अब उन्हें न चाहते हुए भी खाने के लिए 300 से 400 रुपये तक एक्स्ट्रा खर्च करना पड़ रहा है।

यात्रियों में नाराजगी

यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी भी जताई है। कई लोगों ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा कि यह बदलाव चुपचाप किया गया और टिकट बुक करते समय उन्हें बिना जानकारी के ही एक्स्ट्रा पैसे चुकाने पड़े। एक यूजर ने लिखा, “मैं सिर्फ तीन घंटे के सफर पर था, लेकिन सिस्टम ने अपने आप मील जोड़ दिया- बिना पूछे ही!”

रेलवे अधिकारियों क्या कहना?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे अधिकारियों ने दावा किया है कि “नो फूड” ऑप्शन पूरी तरह हटाया नहीं गया है, बल्कि उसकी जगह में थोड़ा बदलाव किया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यात्रियों के लिए ऑप्टृ-आउट करने का ऑप्शन अभी भी उसी पेज पर मौजूद है, बस थोड़ा ध्यान से देखने की जरूरत है। फिर भी, यात्रियों में भ्रम और असंतोष बना हुआ है, क्योंकि अधिकतर लोगों को यह ऑप्शन दिख नहीं रहा। एक्सपर्ट का कहना है कि रेलवे को अपने पोर्टल और ऐप में पारदर्शिता लानी चाहिए, ताकि यात्रियों को किसी भी सेवा के लिए मजबूर न किया जाए।

साभार : इंडिया टीवी

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।