लोड हो रहा है...

भाजपा विधायक प्रेम कुमार सर्वसम्मति से बिहार विधानसभा के नए स्पीकर चुने गए

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

पटना. बिहार की राजनीति में मंगलवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेम कुमार निर्विरोध रूप से बिहार विधानसभा अध्यक्ष चुन लिए गए। सदन में स्पीकर पद के लिए किसी अन्य नामांकन के न होने से उनके चयन की राह आसान रही। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद नेता तेजस्वी यादव स्वयं प्रेम कुमार को लेकर अध्यक्षीय कुर्सी तक गए, जो राजनीतिक सौहार्द और परंपरा का प्रतीक बना।

अध्यक्ष चुने जाने के बाद सदन के नेता नीतीश कुमार सहित सभी दलों के प्रमुख नेताओं ने प्रेम कुमार को बधाई दी। सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में सदन और अधिक सुचारु ढंग से चलेगा तथा सरकार और विपक्ष के बीच स्वस्थ तालमेल कायम रहेगा। नेताओं ने कहा कि प्रेम कुमार का लंबा संसदीय अनुभव विधानसभा को लाभ पहुंचाएगा और वे सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार करेंगे।

अपने प्रथम संबोधन में प्रेम कुमार ने गीता के श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता ने जिस ऐतिहासिक जनमत से सरकार और जनप्रतिनिधियों पर विश्वास जताया है, उसकी रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सर्वसम्मति से चयनित होना उनके लिए गर्व की बात है, लेकिन इसके साथ ही जिम्मेदारी भी पहले से कहीं अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि वे पूरी निष्पक्षता और मर्यादा के साथ अपनी भूमिका निभाएंगे।

प्रेम कुमार ने कहा कि जनता की सेवा का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य है। गया जी की धरती और अपने क्षेत्र की जनता के प्रति उन्होंने विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास और उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि संसद और विधानसभाएं विचारों के आदान–प्रदान का सर्वोच्च मंच हैं, इसलिए मर्यादा और संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है।

इस प्रकार, प्रेम कुमार का निर्विरोध चयन न केवल राजनीतिक सहमति का संदेश देता है, बल्कि आने वाले समय में सदन की कार्यवाही के अधिक सुचारु और सकारात्मक होने की उम्मीद भी जगाता है।

विधानसभा में दूसरे दिन के सुनील कुमार, जीवेश कुमार, विनय बिहारी, मदन साहनी, केदार नाथ सिंह ने ली शपथ। अनंत सिंह और अमरेंद्र पांडेय की शपथ लेने को बचे हुए है।

साभार : दैनिक जागरण

‘गांधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ पुस्तक के बारे में जानने के लिए लिंक पर क्लिक करें :

https://matribhumisamachar.com/2025/12/10/86283/

आप इस ई-बुक को पढ़ने के लिए निम्न लिंक पर भी क्लिक कर सकते हैं:

https://www.amazon.in/dp/B0FTMKHGV6

यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।