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सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में 2-3 आतंकवादियों को घेरा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू. जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चटरू इलाके में सेना और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा पहाड़ी क्षेत्र में छिपे आतंकवादियों का पता लगाने के लिए अभियान शुरू करने के बाद मुठभेड़ शुरू हुई। माना जा रहा है कि घेराबंदी वाले इलाके में कम से कम तीन आतंकवादी छिपे हुए हैं। अमरनाथ यात्रा के तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को जम्मू से रवाना किए जाने के कुछ घंटों बाद ही मुठभेड़ शुरू हो गई। आतंकवादियों के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद पुलिस, सेना और सीआरपीएफ समेत सुरक्षा बलों ने बुधवार शाम चटरू के कुचल इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया। जैसे ही सुरक्षा दल ने तलाशी शुरू की, आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई।

जैश के आतंकी जंगलों में छिपे

जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने एक्स पर लिखा, “विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर किश्तवाड़ के कंजल मांडू में एक संयुक्त तलाशी अभियान चल रहा था। आतंकवादियों ने फायरिंग की तो सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। घटनास्थल पर घेराबंदी को मजबूत करने और आतंकवादियों को पकड़ने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद संगठन के दो से तीन आतंकवादियों के छिपे होने की आशंका है।

22 मई को भी हुई थी आतंकियों के साथ मुठभेड़

पिछले एक साल में इस इलाके में कई मुठभेड़ें हो चुकी हैं। 22 मई को सेना द्वारा आतंकवादियों के खिलाफ अभियान शुरू करने के बाद चटरू इलाके में कार्रवाई में एक सैनिक शहीद हो गया था। कुछ साल पहले तक आतंकवाद से मुक्त रहा यह इलाका अब सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बन गया है

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था हाई अलर्ट पर

तीन जुलाई से शुरू हो रही वार्षिक अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था हाई अलर्ट पर है। कश्मीर में तैनात मौजूदा सुरक्षा ढांचे के अलावा, यात्रा सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों की लगभग 600 अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किया गया है। सुरक्षा चिंताओं के कारण, पहलगाम और बालटाल अक्ष से पूरे यात्रा मार्ग को नो-फ्लाई ज़ोन घोषित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि इस साल यात्रियों के लिए कोई हेलीकॉप्टर सेवा नहीं होगी।

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।