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विराट कोहली ने दिल्ली टीम से विजय हजारे ट्रॉफी खेलने के लिए दी सहमति

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. साउथ अफ्रीका के खिलाफ चल रहे एकदिवसीय सीरीज के बीच विराट कोहली ने बड़ा फैसला लिया है. तमाम अटकलों को विराम लगाते हुए कोहली ने ये कन्फर्म कर दिया है कि वो आगामी घरेलू टूर्नामेंट विजय हजारे ट्रॉफी में खेलेंगे. पहले ये रिपोर्ट सामने आई थी कि बीसीसीआई के फरमान को ना मानते हुए विराट कोहली ने डोमेस्टिक क्रिकेट में खेलने से इनकार कर दिया है. हालांकि, अब डीडीसीए अध्यक्ष रोहन जेटली ने मंगलवार (2 दिसंबर) शाम को इसपर मुहर लगाते हुए कहा कि विराट कोहली विजय हजारे ट्रॉफी 2025/26 में कुछ मैच खेलेंगे.

दिल्ली के लिए आखिरी मैच में तोड़ा था दिल

बता दें कि पिछले साल ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टेस्ट सीरीज के दौरान विराट कोहली ने बेहद खराब प्रदर्शन किया था. टीम इंडिया को भी करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा और उसके बाद बीसीसीआई ने सख्त कदम उठाते हुए सभी सीनियर खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट में खेलने का निर्देश दिया था. विराट कोहली उसके बाद रणजी ट्रॉफी मैच में दिल्ली के लिए एक मैच खेले थे. रेलवे के खिलाफ उस मुकाबले में अरुण जेटली स्टेडियम में हजारों फैंस अपने पसंदीदा खिलाड़ी को देखने पहुंचे थे, लेकिन कोहली सिर्फ 4 रन बनाकर आउट हो गए थे.

कोहली आखिरी बार विजय हजारे ट्रॉफी में कब खेले थे?

विराट कोहली ने आखिरी बार 2009/10 सीजन में विजय हजारे ट्रॉफी में हिस्सा लिया था. इस टूर्नामेंट में उन्होंने आखिरी मैच 18 फरवरी, 2010 को खेला था. उसके बाद वो टीम इंडिया के साथ घर पर साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में खेले थे.

विजय हजारे ट्रॉफी में कैसा है विराट कोहली का रिकॉर्ड?

जब विराट कोहली 15 साल के लंबे इंतजार के बाद विजय हजारे ट्रॉफी खेलने उतरेंगे तो फैंस की निगाहें उनपर रहेगी. 37 वर्षीय स्टार खिलाड़ी ने विजय हजारे ट्रॉफी में 14 मुकाबले खेले हैं. उन्होंने 68.25 की औसत और 106.08 की स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 819 रन बनाए हैं. घरेलू 50 ओवर टूर्नामेंट में उन्होंने 4 शतक और 3 अर्धशतक जड़े हैं.

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साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।