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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शर्त पर नहीं कर सकते समझौता : रूस

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मास्को. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका की ओर से विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ के बीच बुधवार को हुई बैठक में ट्रंप की ‘यूक्रेन योजना’ पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं हो सका। रूसी राष्ट्रपति के सहायक यूरी उशाकोव ने बताया कि बातचीत लगभग पांच घंटे चली, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर भी शामिल थे।
रूसी मीडिया समूह- रशिया टुडे (आरटी) के मुताबिक, उशाकोव ने कहा कि अमेरिकी प्रस्तावों में कुछ बिंदु रूस को स्वीकार करने लायक लगे, हालांकि कई पक्ष ऐसे थे जो क्रेमलिन के हितों के तहत नहीं थे। उन्होंने कहा, “अब तक कोई समझौता नहीं हुआ है। कुछ अमेरिकी प्रस्ताव रूस को स्वीकार्य हैं, लेकिन कुछ नहीं। हमने मुद्दों के सार पर बात की, न कि विशेष शब्दों या समाधान पर। दोनों पक्ष सहयोग की बड़ी संभावनाएं देखते हैं।” उशाकोव ने यह भी पुष्टि की कि बैठक में क्षेत्रीय मुद्दे पर भी चर्चा हुई। यह पूछे जाने पर कि क्या इन बातचीत से शांति करीब आई है, उन्होंने कहा, “निश्चित रूप से दूर नहीं हुई है।” दूसरी तरफ क्रेमलिन के अफसर किरिल दिमित्रिएव ने बैठक को उत्पादक बताया।
रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन ने 28 बिंदुओं वाला एक संशोधित शांति प्रस्ताव साझा किया है, जिसे कीव और यूरोपीय देशों की आपत्तियों के बाद बदला गया था, क्योंकि शुरुआती मसौदे को मॉस्को की शर्तों के प्रति काफी नरम माना गया था।

गौरतलब है कि चर्चा से कुछ घंटे पहले ही पुतिन ने एक निवेश मंच से अपने संबोधन के दौरान कहा था कि अगर यूरोपीय देश टकराव का रास्ता चुनते हैं, तो रूस सैन्य मुकाबले के लिए तैयार है। पुतिन ने कहा हम यूरोप से युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर वे शुरू करेंगे, तो हम तैयार हैं। यूरोपीय नेता बातचीत को प्राथमिकता नहीं दे रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश अमेरिका और ट्रंप द्वारा सुझाए गए शांति प्रयासों में अड़चन पैदा कर रहे हैं।

अमेरिका और यूक्रेन की बातचीत भी जारी
इधर, इसी समय यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदमिर जेलेंस्की आयरलैंड पहुंचे, जहां उन्होंने यूरोपीय नेताओं से समर्थन को मजबूत करने की कोशिश की। जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका और रूस की बातचीत के बाद मिलने वाले संकेत आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन हर दिन जानें गंवा रहा है, इसलिए अब ठोस नतीजों की जरूरत है, केवल बातों से काम नहीं चलेगा। उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कीव की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद प्रमुख रुस्तेम उमेरोव के साथ बैठक की। रुबियो ने चर्चा को उपयोगी लेकिन जटिल बताया।
साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।