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मंदी के कगार पर पहुंच चुकी है अमेरिकी अर्थव्यवस्था : मूडीज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार सत्ता में लौटने के बाद लगातार ऐसे फैसले लेते रहे हैं, जिनसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी हलचल देखी गई है. ‘अमेरिकन फर्स्ट’ का नारा देने वाले ट्रंप के ये दांव अब उल्टा असर दिखाने लगे हैं. दुनियाभर के देशों पर टैरिफ थोपने की उनकी नीति ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका को मंदी की चपेट में ला खड़ा किया है. यह दावा किसी और ने नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने किया है.

मंदी के मुहाने पर खड़ा अमेरिका

राष्ट्रपति ट्रंप अक्सर अमेरिकियों को यह भरोसा दिलाते हैं कि उनके नेतृत्व में अमेरिकी इकोनॉमी अब तक की सबसे मजबूत है. लेकिन मूडीज के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जैंडी ने उनके इस दावे पर सवाल उठाते हुए हकीकत सामने रख दी है. ट्रंप प्रशासन जहां जीडीपी ग्रोथ, विदेशी निवेश में बढ़ोतरी और महंगाई पर नियंत्रण को अपनी उपलब्धि बताता रहा, वहीं मार्क जैंडी का कहना है कि हकीकत इसके उलट है. उनके मुताबिक अमेरिका इस समय नौकरी से लेकर कंज्यूमर प्राइस तक हर मोर्चे पर ‘लाल निशान’ पर खड़ा है.

ट्रंप प्रशासन के ‘खोखले’ दावे

न्यूज़वीक को दिए एक इंटरव्यू में मूडीज के चीफ इकोनॉमिस्ट ने कहा कि अमेरिकी इकोनॉमी की खस्ताहाल स्थिति को लेकर जो आशंकाएं कई महीने पहले जताई गई थीं, अब वे सच होती नजर आ रही हैं. उनका अनुमान है कि 2025 के आखिर तक अमेरिका की अर्थव्यवस्था भारी मंदी की चपेट में आ जाएगी. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि इस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी में है. लेकिन वे ऐसा मानते हैं कि यह मंदी के बिल्कुल कगार पर खड़ा है. गौरतलब है कि मार्क जैंडी वही अर्थशास्त्री हैं जिन्होंने 2008 के वित्तीय संकट का सटीक पूर्वानुमान लगाया था. बीते कुछ महीनों से वे लगातार ट्रंप प्रशासन की व्यापार और रोजगार नीतियों पर सवाल उठाते हुए चेतावनियां दे रहे हैं कि इन कदमों का नतीजा अमेरिकी इकोनॉमी पर गंभीर असर के रूप में सामने आ सकता है.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।