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ममता बनर्जी ने ‘बाबरी मस्जिद’ बनाने का एलान करने वाले विधायक हुमायूं कबीर को टीएमसी से सस्पेंड किया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में हाल ही में बाबरी मस्जिद बनाने का एलान किया था। इनके इस फैसले को लेकर टीएमसी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया है।

तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद बनाने पर अड़े विधायक हुमायूं कबीर को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया है। इसकी घोषणा करते हुए मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा कि हुमायूं बाबरी मस्जिद क्यों बनाएंगे। अगर अधिक पैसा था उनके पास तो दूसरा कुछ क्यों नहीं बनाने की बात कही। बाबरी मस्जिद प्रोपेगेंडा के पीछे भाजपा का हाथ है। हुमायूं रेजीनगर में रहते है और विधायक वो भरतपुर से है, बेलडांगा में जानबुझकर दंगा करने की साजिश है।

बता दें कि टीएमसी विधायक ने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखने की घोषणा की थी। हुमायूं कबीर को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नाराजगी भी बताई जाती है। जिसके बाद पार्टी ने उन्हें सस्पेंड करने का फैसला लिया है।

मैं बाबरी मस्जिद बना कर रहूंगा

वहीं, हुमायूं ने कहा ने कहा कि आज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मुर्शिदाबाद में रैली व सभा करने वाली हैं। मुझे बुलाकर अपमानित किया गया है। इसके पीछे साजिश है। मैं बाबरी मस्जिद बना कर रहूंगा। कल पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा। इसके अलावा 22 को नई पार्टी के गठन की घोषणा करूंगा। राज्य के 122 सीटों पर मेरी पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी।

बाबरी के लिए जान भी दे देंगे

कबीर ने हाल में घोषणा की थी कि मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखी जाएगी। छह दिसंबर को 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने की बरसी है। अपनी घोषणा पर अडिग मुर्शिदाबाद के भरतपुर से तृणमूल विधायक कबीर ने फिर कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह बाबरी मस्जिद बनवाने के लिए अपनी जान भी दे देंगे। उन्होंने साथ ही कहा कि छह दिसंबर को शिलान्यास के दिन मुर्शिदाबाद के रेजीनगर से बेलडांगा तक एक बहुत बड़ी रैली निकाली जाएगी, जिसके चलते उस दिन वहां का राष्ट्रीय राजमार्ग मुस्लिमों के कब्जे में होगा।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।