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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन रूसी भाषा में लिखी श्रीमद्भागवतगीता की भेंट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. दो दिन के दिल्ली दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खास गिफ्ट दिया है. उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन को रूसी में लिखी गीता की एक कॉपी भेंट की. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा कि गीता की शिक्षाएं दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरणा देती हैं.

इससे पहले, राष्ट्रपति पुतिन के भारत पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. भारत इस दौरे को कितनी अहमियत दे रहा है, इसका पता इसी से चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर खुद पालम हवाई अड्डे पहुंचे और विमान से उतरने पर गले लगाकर पुतिन का स्वागत किया.

चार साल के बाद भारत आए पुतिन को लेकर पीएम मोदी हवाई अड्डे से एक ही कार में निकले और प्रधानमंत्री आवास पहुंचे. करीब तीन महीने पहले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के बाद चीन के शहर तियानजिन में उन्होंने एक ही कार की सवारी की थी.

इसके बाद पीएम मोदी ने शाम में रूसी राष्ट्रपति के लिए खास डिनर का आयोजन किया. पिछले साल जुलाई में पुतिन ने भी प्रधानमंत्री की मॉस्को यात्रा के दौरान उनका इसी तरह सत्कार किया था. पुतिन के स्वागत के लिए पीएम आवास को फूलों से सजाया गया है और रोशनी से जगमग किया गया है.

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पुतिन का यह दौरा करीब आठ दशक पुरानी भारत-रूस साझेदारी को और मजबूत करने वाला है. दोनों देशों के बीच साझेदारी जटिल भू-राजनीतिक माहौल के बावजूद स्थिर बनी हुई है.

दोनों नेता शुक्रवार को 23वीं भारत-रूस शिखर वार्ता में हिस्सा लेंगे. इस दौरान दोनों देशों के संबंधों को और व्यापक बनाने के कई फैसले हो सकते हैं. दोनों की वार्ता का मुख्य विषय रक्षा संबंधों को मजबूत करना, भारत-रूस व्यापार को बाहरी दबाव से सुरक्षित रखना और छोटे मॉड्यूलर संयंत्रों में सहयोग की संभावनाओं की तलाश जैसे मुद्दों पर केंद्रित होगा.

रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में संभवतः सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं ओर अमेरिका ने भारतीय सामान पर भारी 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत कर भी शामिल है.

साभार : एनडीटीवी

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।