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पूर्वोत्तर के लिए 5700 करोड़ के प्रोजेक्ट हुए स्वीकृत, अब नेपाल में भी चलेंगे 200 और 500 रुपए के भारतीय नोट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि प्रधानमंत्री उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास पहल (पीएम-डिवाइन) के तहत लगभग 5,700 करोड़ रुपये की 44 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सिंधिया ने बुधवार को मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता के दौरान यह जानकारी दी। सिंधिया ने कहा कि पीएम-डिवाइन मंत्रालय की सबसे महत्वपूर्ण योजना है, जिसे केंद्रीय बजट 2022-2023 में शुरू किया गया था। इसकी कुल लागत 6,600 करोड़ रुपये है। उन्होंने बताया कि 44 परियोजनाओं में से तीन पूरी हो चुकी हैं और 41 पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि योजना की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है और मंत्रालय पूरी राशि का उपयोग करने की राह पर है। पूर्वोत्तर बन रहा एशिया का गेटवे : सोनोवाल…केन्द्रीय जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि पूर्वोत्तर एकीकृत जांच चौकियों और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के जरिये दक्षिण पूर्व एशिया के लिए लॉजिस्टिक्स और सांस्कृतिक गेटवे बन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दशकों की उपेक्षा को बदलकर यह क्षेत्र अष्टलक्ष्मी के रूप में उभर रहा है।

नेपाल में अब 100 से अधिक मूल्य वाले 200-500 रुपये  के भारतीय नोट भी चलेंगे
नेपाल में अब 100 रुपये से अधिक मूल्य के भारतीय नोटों के चलन के लिए रास्ता साफ हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने नेपाल में उच्च मूल्य वाले नोटों के विनिमय को मंजूरी दी है। अभी तक नेपाल में केवल 100 रुपये तक का भारतीय नोट स्वीकार्य था लेकिन अब 200 और 500 रुपये के नोट भी चलेंगे। हालांकि, यह व्यवस्था तुरंत लागू नहीं होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक को इसके लिए अलग से सर्कुलर (परिपत्र) जारी करना होगा। इसके बाद ही आम नागरिक और पर्यटक बड़े मूल्य के नोट लेनदेन में प्रयोग कर सकेंगे। भारत में वर्तमान में 100, 200 और 500 रुपये के नोट प्रचलन में हैं। 2016 में भारत में नोटबंदी के बाद नेपाल राष्ट्र बैंक ने बड़े मूल्य के नोटों का विनिमयन रोक दिया था। अब भारत ने नेपाल और भूटान में 25,000 रुपये तक भारतीय मुद्रा ले जाने और लाने की अनुमति दी है। पहले सिर्फ भारत से 25 हजार रुपये तक लाने की अनुमति थी। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल के अनुसार, नई व्यवस्था से दोनों देशों के यात्रियों को राहत मिलेगी।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।