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तहरीक मुस्लिम शब्बन ने तेलंगाना में बाबरी मस्जिद की स्मारक बनाने का किया ऐलान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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हैदराबाद. बाबरी मस्जिद विध्वंस के 33वीं वर्षी के मौके पर देश में एक बार फिर बाबरी मस्जिद की राजनीति तेज हो गई है. तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखी. वहीं, तेलंगाना के हैदराबाद में तहरीक मुस्लिम शब्बन नाम की संगठन ने बाबरी मस्जिद के लिए एक मेमोरियल बनाने का ऐलान किया है.

दरअसल, बाबरी मस्जिद विध्वंस के 33वीं वर्षी के मौके पर हैदराबाद में एक पब्लिक मीटिंग का आयोजन किया गया. इसी मीटिंग में मुस्लिम शब्बन के अध्यक्ष मुश्ताक मलिक ने कहा कि ग्रेटर हैदराबाद में बाबरी मस्जिद के लिए एक मेमोरियल बनाया जाएगा, साथ ही वेलफेयर इंस्टीट्यूशन भी बनाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि हम जल्द ही ऐलान करेंगे कि यह मेमोरियल कैसे और कितने समय में बनाया जाएगा.

मुश्ताक मलिक ने आगे कहा कि बाबर के नाम से किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद बनाने के लिए बाबर की तरफ से कोई आर्थिक मदद दी गई थी. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि किसी लोकल आदमी का नाम बाबर हो और उसी के नाम पर मस्जिद का नाम बाबरी रखा गया है, लेकिन BJP और RSS बाबर को मुद्दा बनाना चाहते हैं.

मुश्ताक मलिक ने कहा कि अगर हम तुलसीदास की रामचरितमानस देखें, तो वह बाबरी मस्जिद बनने के 60 साल बाद लिखी गई थी, लेकिन उस रामचरितमानस में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि राम मंदिर तोड़ा गया था. उन्होंने कहा कि मुगल शासक अकबर के महल में जोधाबाई थीं, रस्में, प्रार्थनाएं और हवन होते थे. उस समय मान सिंह उस समय आर्मी चीफ थे, वह अकबर से राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के बारे में पूछ सकते थे.

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साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।