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आसिम मुनीर को ताकतवर बनाने वाले संविधान संशोधन के खिलाफ सड़क पर उतरीं पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

इस्लामाबाद. पाकिस्तान में 27वें संवैधानिक संशोधन को लेकर हंगामा हो गया है। विपक्षी पार्टियों ने इसके खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का एलान कर दिया है। विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि इस संशोधन से संविधान की नींव हिल जाएगी। गौरतलब है कि इस संविधान संशोधन के जरिए पाकिस्तानी सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की ताकत और बढ़ जाएगी। इस संविधान संशोधन के तहत संविधान के अनुच्छेद 243 में बदलाव का प्रस्ताव है। इस बदलाव के तहत चेयरमैन जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी का पद खत्म करके उसकी जगह चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद सृजित किया जा रहा है।

संविधान संशोधन से आसिम मुनीर की बढ़ जाएगी ताकत

संविधान संशोधन के बाद आसिम मुनीर के पास न सिर्फ थल सेना बल्कि वायु सेना और नौसेना का भी नियंत्रण आ जाएगा। इसका विपक्षी पार्टियों द्वारा विरोध किया जा रहा है। संविधान संशोधन के अन्य प्रस्तावों के तहत एक संघीय संवैधानिक अदालत की भी स्थापना की जाएगी और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में भी बदलाव किया जा रहा है। विपक्ष का दावा है कि संघीय संवैधानिक अदालत के गठन का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को कम करना है। संशोधन के तहत पाकिस्तान के राष्ट्रपति को भी जीवन भर आपराधिक मामलों से छूट मिल जाएगी।

विपक्षी पार्टियों ने किया देशव्यापाी विरोध का एलान

पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने शनिवार को ऊपरी सदन यानी सीनेट में यह संशोधन पेश किया गया। विधेयक पर चर्चा से पहले ही विधेयक को सदन की समिति के पास चर्चा के लिए भेज दिया गया है। पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ और अन्य विपक्षी दलों वाले गठबंधन तहरीक-ए-तहफ्फुज-आईन-ए-पाकिस्तान ने संविधान संशोधन का देशव्यापी विरोध करने का एलान किया है। मजलिस वहदत ए मुस्लिमीन के प्रमुख अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने कहा कि ‘इस संविधान संशोधन से देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं पंगु हो जाएंगी और पूरे देश को इसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए।’ एक अन्य विपक्षी नेता ने कहा कि यह संविधान संशोधन संविधान की नींव हिला देगा।
साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।