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सुरक्षाबलों को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में भारी मात्रा में हथियार बरामद

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू. उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में सुरक्षाबलों ने नियंत्रण रेखा (LoC) के पास एक बड़ी घेराबंदी और तलाशी अभियान (CASO) चलाया जिसमें भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ. ये ऑपरेशन विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू किया गया था. सुरक्षा बलों को इनपुट मिला था कि आतंकवादियों ने सीमा पार से हथियारों की तस्करी की है जिससे ये अभियान समय रहते चलाया गया.

सुरक्षा बलों की ओर से चलाए गए इस ऑपरेशन में सेना और पुलिस के जवानों ने मिलकर कुपवाड़ा के करनाह क्षेत्र के अमरोही गांव में तलाशी अभियान चलाया. इस दौरान सरकारी खाद्य भंडार भवन के पास तलाशी ली गई जहां से दो एके-47 राइफलें, दो एके मैगजीन और 12 राउंड गोला-बारूद बरामद किए गए. इस कार्रवाई को सुरक्षाबलों की महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि इस तरह की तस्करी अक्सर आतंकवादियों के हथियारों के भंडारण के लिए की जाती है.

कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में बड़ी बरामदगी

सुरक्षाबल अब बरामद किए गए हथियारों और गोला-बारूद से जुड़े आरोपियों और इच्छित प्राप्तकर्ताओं की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि ये बरामदगी आतंकवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में एक अहम कदम है जो कश्मीर में सुरक्षाबलों की ओर से की जा रही कारवाई को और मजबूत करेगी.

कश्मीर सुरक्षा को लेकर खुफिया खुफिया एजेंसियों की चेतावनी

खुफिया एजेंसियों ने सुरक्षाबलों को ये भी चेतावनी दी है कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की ओर से कई लॉन्च पैड एक्टिव कर दिए गए हैं और आतंकवादियों ने घुसपैठ के लिए एलओसी पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है. हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने 5 फरवरी को एक संयुक्त रैली आयोजित की जिसमें हमास के प्रतिनिधि भी शामिल थे. इस तरह के घटनाक्रम से ये स्पष्ट है कि आतंकवादी संगठन अपने रणनीति में बदलाव ला रहे हैं जिससे कश्मीर में सुरक्षा स्थिति और जटिल हो सकती है.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।