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जैविक युद्ध में प्रयोग होने वाला राइसिन जहर मिलने के बाद डॉ. मोहियुद्दीन सईद का घर सील

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. आतंकवादी साजिशों की धुंध में फिर से एक बार तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद का नाम सामने आया है. इस मामले को लेकर गुजरात के एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने बुधवार (12 नवंबर, 2025) को बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. गुजरात ATS ने अहमदाबाद में लोगों की हुई गिरफ्तारियों के बाद मिले इनपुट्स के आधार पर तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक बार फिर छापेमारी की है.

गुजरात एटीएस की यह कार्रवाई राइसिन आतंकी साजिश से जुड़ी है. इस ऑपरेशन का मुख्य निशाना राज्य के खम्मम जिले में रहने वाला 35 वर्षीय MBBS डॉक्टर अहमद मोहियुद्दीन सईद था, जिसके घर पर गुजरात एटीएस ने छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया और घर की तलाशी लेने के बाद उसे सील कर दिया गया.

जांच में अब तक क्या हुआ खुलासा?

सूत्रों के अनुसार, गुजरात ATS की टीम ने बुधवार (12 नवंबर, 2025) की सुबह डॉ. मोहियुद्दीन सईद के घर पर छापा मारा. एटीएस ने सईद के घर से कई डिजिटल उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं. यह कार्रवाई अहमदाबाद में हुई कुछ गिरफ्तारियों के बाद शुरू की गई है, जिसमें राइसिन नामक घातक विष का उपयोग कर बड़े पैमाने पर आतंकी हमले की साजिश रचने का खुलासा हुआ था.

जैविक युद्ध में इस्तेमाल किया जा सकता है राइसिन जहर

राइसिन एक बहुत ही खतरनाक विष है, जिसे कैस्टर बीन से निकाला जाता है. इसका उपयोग जैविक युद्ध में किया जा सकता है और यह मात्र एक मिलीग्राम मात्रा में भी जानलेवा साबित हो सकता है. जांच एजेंसियों को आशंका है कि आतंकी संगठन इस विष का उपयोग कर देश के विभिन्न हिस्सों में आतंक फैलाने की योजना बना रहे थे.

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डॉक्टर सईद की पृष्ठभूमि की जांच की जा रही है और उसके संपर्कों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है. सूत्रों का कहना है कि उसकी चिकित्सा ज्ञान का उपयोग राइसिन के उत्पादन और उपयोग में किया जा सकता था.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।