लोड हो रहा है...

ऑस्ट्रेलिया ने महिला वनडे में सबसा बड़ा लक्ष्य हासिल कर भारत को हराया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
6 Min Read

नई दिल्ली. ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम ने रविवार को भारत के खिलाफ 331 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए इतिहास रच दिया। टीम ने महिला वनडे क्रिकेट में सबसे बड़े लक्ष्य को तीन विकेट शेष रहते हासिल कर नया रिकॉर्ड अपने नाम किया। विशाखापत्तनम में खेले गए इस रोमांचक महिला विश्व कप मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 48.5 ओवर में 330 रन बनाए। भारत की ओर से प्रतिका रावल और स्मृति मंधाना ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 155 रनों की साझेदारी की। लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने कप्तान एलिसा हीली की बेहतरीन पारी की बदौलत 49 ओवर में सात विकेट पर 331 रन बनाकर मैच जीत लिया। हीली ने 107 गेंदों में 142 रनों की दमदार और मैच जिताने वाली पारी खेली। भारत की ओर से श्री चरणी ने तीन विकेट हासिल किए, जबकि अमनजोत कौर और दीप्ति शर्मा ने दो-दो विकेट लिए।

ऑस्ट्रेलिया ने हासिल किया महिला वनडे का सबसे बड़ा लक्ष्य

छह गेंदों के शेष रहते ऑस्ट्रेलिया ने 331 रनों के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया। यह महिला वनडे इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज है। इससे पहले का रिकॉर्ड 302 रन का था, जिसे श्रीलंका महिला टीम ने 2024 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हासिल किया था।

महिला वनडे के सफल रन चेज

लक्ष्य (रन)टीमविपक्षी टीमजगहसाल/ टूर्नामेंट
331ऑस्ट्रेलिया महिला टीमभारत महिला टीमविशाखापत्तनम2025 विश्व कप
302श्रीलंका महिला टीमदक्षिण अफ्रीका महिला टीमपोचेफस्ट्रूम2024
289ऑस्ट्रेलिया महिला टीमन्यूजीलैंड महिला टीमनॉर्थ सिडनी2012
283ऑस्ट्रेलिया महिला टीमभारत महिला टीमवानखेड़े (मुंबई)2023
282ऑस्ट्रेलिया महिला टीमभारत महिला टीमन्यू चंडीगढ़2025

शीर्ष पर पहुंचा ऑस्ट्रेलिया

चार मैचों में तीन जीत के साथ सात अंक लेकर ऑस्ट्रेलियाई टीम महिला विश्व कप की अंक तालिका में शीर्ष पर पहुंच गई है। वहीं, इंग्लैंड एक बार फिर दूसरे स्थान पर खिसक गई। भारत लगातार दो मैचों में हार के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है। उसके खाते में चार अंक हैं और नेट रन रेट 0.682 है। चौथे पायदान पर दक्षिण अफ्रीका की टीम है जिसके भी चार अंक हैं। हालांकि, उसका नेट रन रेट -0.888 है।

एलिसा हीली की कप्तानी पारी

कप्तान एलिसा हीली (142) ने शानदार शतक जड़कर टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। हीली ने शुरुआत से ही भारतीय गेंदबाजों पर हमला बोला। उन्होंने क्रांति गौड़ के एक ओवर में एक छक्का और तीन चौके लगाकर मैच का रुख बदल दिया। हीली ने सिर्फ 35 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया, जो मौजूदा विश्व कप का सबसे तेज पचासा है। इसके बाद उन्होंने महज 84 गेंदों में अपने करियर का छठा शतक पूरा किया। वह 107 गेंदों में 21 चौके और तीन छक्के की मदद से 142 रन बनाकर पवेलियन लौटीं। श्री चरणी (10-1-41-3) ने भारत के लिए शानदार स्पेल किया। उन्होंने फीबी लिचफील्ड और एनाबेल सदरलैंड जैसे अहम विकेट लिए। एक समय ऑस्ट्रेलिया के तीन विकेट पर 265 रन थे, लेकिन हीली के आउट होने (142) के बाद कुछ झटके लगे और स्कोर 303/7 हो गया। हीली और एश्ले गार्डनर (45) ने चौथे विकेट के लिए 95 रन जोड़े, जिससे मैच वापस ऑस्ट्रेलिया की पकड़ में आया। एलिस पेरी (47 नाबाद), जो पहले चोट के कारण रिटायर हर्ट हो गई थीं, आखिर में लौटीं और विजयी पारी पूरी की।

मंधाना और प्रतिका ने दिलाई मजबूत शुरुआत

स्मृति मंधाना (80) और प्रतिभा रावल (75) ने पहले विकेट के लिए 155 रन की साझेदारी की, जिससे टीम को मजबूत नींव मिली। मंधाना ने 46 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और इसी पारी के दौरान वह महिला वनडे में 5000 रन पूरे करने वाली सबसे तेज और सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गईं। रावल ने भी 69 गेंदों में पचास रन पूरे किए। मंधाना ने स्पिनर सोफी मोलिनेक्स के पहले ही ओवर में 18 रन ठोककर रफ्तार पकड़ी। दोनों ने मिलकर अपनी छठी 100 रन की साझेदारी दर्ज की। हालांकि, मंधाना के आउट होने के बाद भारत की गति थोड़ी धीमी पड़ी। इसके बाद रावल, कप्तान हरमनप्रीत कौर और हरलीन देओल जल्दी आउट हो गईं और स्कोर 38वें ओवर में 240/4 हो गया। अंत में ऋचा घोष (28) और जेमिमा रोड्रिग्स (33) ने पांचवें विकेट के लिए 54 रन जोड़कर भारत को 300 के पार पहुंचाया। पेसर एनाबेल सदरलैंड ने पांच विकेट झटके। इसके अलावा सोफी मोलिनेक्स को तीन और मेगन स्कट व एश्ले गार्डनर ने एक-एक सफलताएं हासिल कीं।
साभार : अमर उजाला

 

‘गांधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ पुस्तक के बारे में जानने के लिए लिंक पर क्लिक करें :

https://matribhumisamachar.com/2025/12/10/86283/

आप इस ई-बुक को पढ़ने के लिए निम्न लिंक पर भी कॉल कर सकते हैं:

https://books.google.co.in/books?id=8-6KEQAAQBAJ

 

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।